भारतीय रिजर्व बैंक की FCNR(B) योजना से विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि
भारतीय रिजर्व बैंक की नई पहल
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की एक नई योजना ने विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव के बीच सकारात्मक परिणाम दिए हैं। जून में शुरू की गई FCNR(B) योजना के तहत प्रवासी भारतीयों से भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई। अगस्त के अंत तक, यह राशि 100 अरब डॉलर को पार कर गई, जिससे देश की वित्तीय सुरक्षा में मजबूती आई।
तीन महीनों में 100 अरब डॉलर का संग्रह
RBI ने जून में एनआरआई के लिए विदेशी मुद्रा जमा करने की FCNR(B) विंडो खोली थी। इसका उद्देश्य उस समय डॉलर जुटाना था जब महंगे कच्चे तेल और भू-राजनीतिक तनाव के कारण भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा था। RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पहले 80 अरब डॉलर की उम्मीद जताई थी, लेकिन 31 अगस्त तक जमा राशि 100 अरब डॉलर से अधिक हो गई। इस सकारात्मक प्रतिक्रिया को देखते हुए सरकार ने समय से पहले ही इस सुविधा को बंद कर दिया।
रिकॉर्ड भंडार से रुपये को मिली मजबूती
एनआरआई से प्राप्त डॉलर ने भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को काफी मजबूत किया है। 21 अगस्त तक, देश का रिजर्व रिकॉर्ड 729.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि 24 जुलाई को यह लगभग 682 अरब डॉलर था। बढ़े हुए भंडार ने RBI को रुपये पर बढ़ते दबाव से निपटने में अधिक सहूलियत दी। ऊंची तेल कीमतों और पश्चिम एशिया में तनाव के बीच यह अतिरिक्त विदेशी मुद्रा सुरक्षा भारत के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
FCNR(B) योजना का महत्व
FCNR(B) का मतलब है Foreign Currency Non-Resident (Bank) खाता, जिसमें एनआरआई अपनी विदेशी कमाई को डॉलर जैसी विदेशी मुद्रा में जमा कर सकते हैं। इसमें भारतीय रुपये में परिवर्तित करना आवश्यक नहीं है। यह एक सावधि जमा होती है और मूलधन तथा ब्याज का भुगतान भी विदेशी मुद्रा में किया जाता है। इससे रुपये की विनिमय दर में उतार-चढ़ाव से होने वाले नुकसान का जोखिम कम हो जाता है। RBI ने इस बार तीन से पांच साल की नई जमाओं के लिए बैंकों को विशेष स्वैप सुविधा देकर योजना को और आकर्षक बनाया।
प्रवासी पूंजी का ऐतिहासिक महत्व
भारत ने आर्थिक संकट के समय प्रवासी भारतीयों की विदेशी मुद्रा का उपयोग पहले भी किया है। 1991 के गंभीर भुगतान संतुलन संकट के दौरान ऐसा कदम उठाया गया था। इसके बाद, 2013 में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 'टेपऱ टैंट्रम' के कारण पूंजी निकासी बढ़ने पर भारत ने प्रवासी भारतीयों से लगभग 34 अरब डॉलर जुटाए थे। इस बार FCNR(B) से प्राप्त डॉलर ने RBI को रुपये को सहारा देने के लिए अतिरिक्त क्षमता प्रदान की है। मंगलवार को रुपया 0.4 प्रतिशत मजबूत होकर 94.7988 प्रति डॉलर तक पहुंच गया, जो 1 जुलाई के बाद का सबसे मजबूत स्तर है।
