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भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि की

भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में महंगाई के बढ़ते दबाव के चलते रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि की है। यह निर्णय मौद्रिक नीति समिति की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना नहीं है। इस लेख में जानें कि महंगाई की वर्तमान स्थिति और भविष्य में ब्याज दरों के संभावित रुख के बारे में क्या कहा गया है।
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आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति का निर्णय

महंगाई में वृद्धि और विभिन्न वस्तुओं की कीमतों पर बढ़ते दबाव के बीच, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने इस महीने रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया। यह जानकारी बुधवार को एमपीसी की बैठक के ब्योरे में साझा की गई। यह निर्णय लगभग चार वर्षों में पहली बार प्रमुख नीतिगत दर को बढ़ाने का है।


गवर्नर का बयान

आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि मौद्रिक नीति के रुख को बदलकर धीरे-धीरे सख्ती की दिशा में बढ़ना उचित है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की कोई संभावना नहीं है। आगे की परिस्थितियों और आर्थिक परिदृश्य के आधार पर दरों में वृद्धि या स्थिरता की संभावना बनी रहेगी।


रेपो दर में वृद्धि का विवरण

आरबीआई ने 7 अक्टूबर को हुई तीन दिवसीय एमपीसी बैठक के बाद रेपो दर को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया। गवर्नर सहित समिति के सभी सदस्यों ने इस वृद्धि के पक्ष में मतदान किया। बैठक के ब्योरे के अनुसार, मल्होत्रा ने कहा कि महंगाई का दबाव अब अधिक व्यापक हो गया है।


महंगाई की स्थिति

अगस्त में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में शामिल 37 प्रतिशत वस्तुओं की महंगाई दर चार प्रतिशत से अधिक थी, जबकि मार्च में यह अनुपात केवल 20 प्रतिशत था। उन्होंने कहा कि ब्याज दरों में वृद्धि का सिलसिला कब तक चलेगा और दरें कितनी बढ़ाई जाएंगी, यह आर्थिक वृद्धि और महंगाई की वास्तविक स्थिति पर निर्भर करेगा।


आरबीआई की डिप्टी गवर्नर का दृष्टिकोण

एमपीसी की सदस्य और आरबीआई की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने कहा कि महंगाई मुख्य रूप से बाहरी आपूर्ति संबंधी झटकों के कारण बढ़ रही है। वर्तमान में इसके लंबे समय तक बने रहने के संकेत बहुत कम हैं। उन्होंने कहा कि महामारी के बाद महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए जब भी महंगाई दर संतोषजनक सीमा तक पहुंची, आरबीआई ने उचित नीतिगत कदम उठाए।


नीतिगत ढांचे की विश्वसनीयता

गुप्ता ने कहा कि इससे नीतिगत ढांचे की विश्वसनीयता बनी रही और महंगाई को लेकर लोगों की उम्मीदें लक्ष्य के अनुरूप रहीं। इसलिए, बढ़ती महंगाई और आर्थिक वृद्धि की मजबूती को देखते हुए, उनका मानना है कि अब और इंतजार करने के बजाय इस बैठक में रेपो दर 0.25 प्रतिशत बढ़ानी चाहिए।