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भारतीय रुपये की कमजोरी जारी, शेयर बाजार में तेजी का असर सीमित

भारतीय रुपये की कमजोरी जारी है, जबकि शेयर बाजार में तेजी देखी जा रही है। 26 अक्टूबर 2026 को रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 29 पैसे की गिरावट दर्ज की। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें रुपये पर दबाव डाल रही हैं। घरेलू शेयर बाजार में तेजी ने गिरावट को कुछ हद तक सीमित किया है, लेकिन विदेशी मुद्रा भंडार में कमी और निवेशकों की चिंताएं स्थिति को और जटिल बना रही हैं। जानें इस विषय पर और अधिक जानकारी।
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भारतीय रुपये की गिरावट का कारण

हालांकि शेयर बाजार में तेजी देखी जा रही है, भारतीय रुपये की कमजोरी कम होने का नाम नहीं ले रही है। 26 अक्टूबर 2026 को, रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 29 पैसे की गिरावट के साथ 95.22 के स्तर पर बंद किया। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने रुपये पर दबाव डाला है। पिछले तीन कारोबारी सत्रों में, भारतीय मुद्रा 84 पैसे कमजोर हो चुकी है.


रुपये की स्थिति और बाजार की प्रतिक्रिया

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में, रुपये ने सोमवार को 94.92 प्रति डॉलर से कारोबार शुरू किया, लेकिन गिरावट के चलते यह 95.26 के निचले स्तर तक पहुंच गया। अंततः, यह 95.22 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। इससे पहले, 23 अक्टूबर को रुपये ने 12 पैसे की गिरावट के साथ 94.93 प्रति डॉलर पर बंद किया था। निरंतर गिरावट ने आयात पर निर्भर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता बढ़ा दी है.


निवेशकों की चिंताएं

विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़ी चिंताओं के कारण निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और सरकारी बॉंड पर ब्याज दरों में मामूली वृद्धि ने भी रुपये को कमजोर किया है। हालांकि, घरेलू शेयर बाजार में तेजी ने रुपये की गिरावट को कुछ हद तक नियंत्रित किया है.


कच्चे तेल की कीमतों का प्रभाव

कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली भी भारतीय मुद्रा को कमजोर कर सकती हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से बाजार में हस्तक्षेप रुपये को सहारा दे सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर के मुकाबले रुपये का कारोबार 94.90 से 95.50 के दायरे में हो सकता है.


वैश्विक तेल बाजार की स्थिति

वैश्विक तेल बाजार में, ब्रेंट कच्चे तेल का वायदा भाव 1.41% गिरकर 115.08 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। फिर भी, तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। भारत अपनी आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है, जिससे कच्चे तेल की महंगाई से आयात बिल बढ़ता है और रुपये पर दबाव पड़ सकता है.


शेयर बाजार की स्थिति

सोमवार को घरेलू शेयर बाजार में अच्छी तेजी देखी गई। सेंसेक्स 482.92 अंक बढ़कर 73,606.75 पर और निफ्टी 153.20 अंक की बढ़त के साथ 22,753.20 पर बंद हुआ। 23 अक्टूबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 887.65 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे.


विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट

भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 16 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 5.011 अरब डॉलर घटकर 721.016 अरब डॉलर रह गया। इससे पहले वाले सप्ताह में भी इसमें 8.578 अरब डॉलर की कमी आई थी। आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक तनाव और डॉलर की चाल रुपये की दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण कारक बने रहेंगे.