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भारतीय रुपये की मजबूती का सिलसिला जारी, जानें क्या है कारण

भारतीय रुपये ने लगातार छठे कारोबारी सत्र में मजबूती दिखाई है, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.92 पर बंद हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक के कदमों ने रुपये को सहारा दिया, लेकिन कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने इसकी बढ़त को सीमित किया। जानें रुपये की स्थिति, इसके पीछे के कारण और भविष्य की संभावनाएं।
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भारतीय रुपये की स्थिति

विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये की मजबूती का सिलसिला लगातार छठे कारोबारी दिन भी जारी रहा। शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को, रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 7 पैसे की बढ़त के साथ 94.92 के स्तर पर कारोबार समाप्त किया। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा डॉलर की मांग को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों ने रुपये को समर्थन प्रदान किया। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण रुपये की बढ़त सीमित रही।


रुपये का कारोबार

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में शुक्रवार को रुपये की शुरुआत 94.75 प्रति डॉलर से हुई। इस दौरान, रुपये ने 94.71 का उच्चतम और 95.06 का न्यूनतम स्तर छुआ। अंततः, यह पिछले कारोबारी सत्र के 94.99 के मुकाबले 7 पैसे की बढ़त के साथ 94.92 पर बंद हुआ। इससे पहले, गुरुवार 15 अक्टूबर को रुपये में 18 पैसे की वृद्धि हुई थी, जिससे यह 94.99 प्रति डॉलर पर पहुंच गया।


रुपये की कीमत पर प्रभाव डालने वाले कारक

रुपये की कीमत पर कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारक प्रभाव डालते हैं। भारत अपनी आवश्यकताओं का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से कच्चा तेल खरीदकर पूरा करता है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, तो तेल आयात करने वाली कंपनियों को अधिक डॉलर की आवश्यकता होती है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ता है। इसी तरह, जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से धन निकालते हैं, तो वे अपनी राशि को डॉलर में परिवर्तित करते हैं, जिससे रुपये की मजबूती प्रभावित होती है।


विश्लेषकों की राय

चॉइस ब्रोकिंग की कमोडिटी तकनीकी विश्लेषक कावेरी मोरे के अनुसार, रुपये अब 94 के महत्वपूर्ण स्तर की ओर बढ़ रहा है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, अमेरिकी सरकारी बॉंड पर बढ़ते प्रतिफल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है। उन्होंने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक रुपये में गिरावट को रोकने और घरेलू महंगाई के प्रभाव को सीमित करने के लिए सक्रिय कदम उठा रहा है।


भविष्य की संभावनाएं

कावेरी मोरे के अनुसार, 8 जून से विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए लागू किए गए विशेष उपायों के तहत रिजर्व बैंक ने बाजार में डॉलर बेचने और डॉलर-रुपये की अदला-बदली से जुड़े सौदों के माध्यम से लगभग 75 से 80 अरब डॉलर का निवेश किया है। डॉलर की बिक्री से बाजार में उसकी उपलब्धता बढ़ती है, जिससे रुपये पर दबाव कुछ हद तक कम हो सकता है। हालांकि, इसका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगा।


डॉलर सूचकांक और कच्चे तेल की कीमतें

इस बीच, डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर सूचकांक 0.41 प्रतिशत गिरकर 101.445 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का प्रमुख मानक ब्रेंट वायदा भाव 0.34 प्रतिशत घटकर 105.56 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।


घरेलू शेयर बाजार की स्थिति

घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स 413.66 अंक चढ़कर 74,729.27 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 148.80 अंक की बढ़त के साथ 23,146.15 पर पहुंच गया। हालांकि, इससे एक दिन पहले विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से शुद्ध आधार पर 5,285.37 करोड़ रुपये की निकासी की थी। यह आंकड़ा 15 अक्टूबर का है और बाजार के आंकड़ों के अनुसार जारी किया गया है। ऐसे में रुपये की आगे की चाल पर विदेशी निवेश और वैश्विक आर्थिक हालात का असर बना रहने की संभावना है।