भारतीय शेयर बाजार में एफपीआई की निकासी में वृद्धि, वैश्विक कारकों का प्रभाव
भारतीय जीडीपी वृद्धि के बावजूद एफपीआई की निकासी
भारत की अप्रैल से जून की तिमाही में 7.8% की जीडीपी वृद्धि दर की उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन के बावजूद, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने सितंबर के पहले सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार से 7,443 करोड़ रुपए की निकासी की है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, अमेरिकी बॉंड यील्ड में वृद्धि और मजबूत डॉलर ने निवेशकों के जोखिम उठाने की क्षमता को प्रभावित किया है।
2026 में एफपीआई की निकासी का आंकड़ा
जुलाई में एफपीआई ने 20,200 करोड़ और अगस्त में 30,919 करोड़ रुपए का निवेश किया था। हालाँकि, हालिया बिकवाली के चलते 2026 में अब तक भारतीय शेयरों से कुल FPI निकासी 2.32 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गई है, जो कि 2025 में हुई 1.66 लाख करोड़ रुपए की निकासी से अधिक है।
कच्चे तेल और बॉंड यील्ड का प्रभाव
यस सिक्योरिटीज के मुख्य निवेश अधिकारी राजकुमार राठी के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से भारत में महंगाई और चालू खाते के घाटे (CAD) को लेकर चिंताएँ बढ़ी हैं। इसके अलावा, अमेरिकी बॉंड यील्ड और डॉलर इंडेक्स की मजबूती ने उभरते बाजारों में विदेशी निवेशकों की रुचि को कम किया है।
वैश्विक कारकों पर निवेशकों की नजर
बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में वैश्विक बॉंड यील्ड विदेशी निवेश का मुख्य आधार बनी रहेंगी। इसके साथ ही, ब्रेंट क्रूड की कीमतें, अमेरिका-ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले आने वाले मुद्रास्फीति के आंकड़े FPI प्रवाह को प्रभावित करेंगे।
डेट मार्केट से भी पूंजी निकासी
विदेशी निवेशकों ने केवल इक्विटी में ही नहीं, बल्कि डेट (कर्ज) बाजार में भी बिकवाली जारी रखी। सितंबर के पहले सप्ताह में एफपीआई ने फुल्ली एक्सेसिबल रूट (FAR) के माध्यम से 377 करोड़ रुपए और वॉलंटरी रिटेंशन रूट (VRR) से 231 करोड़ रुपए निकाले, जबकि जनरल रूट के जरिए केवल 217 करोड़ रुपए का निवेश किया।
