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भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी, कच्चे तेल की कीमतों का असर

भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी है, जिसमें कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और सूचना प्रौद्योगिकी शेयरों में बिकवाली का बड़ा हाथ है। बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी दोनों में गिरावट आई है। वैश्विक बाजारों में सुधार के बावजूद, निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है। छोटी और मझोली कंपनियों के शेयरों में कुछ तेजी देखी गई है, जबकि प्रमुख क्षेत्रों में बिकवाली का दबाव बना हुआ है। जानें इस स्थिति का विस्तृत विश्लेषण और भविष्य की संभावनाएं।
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शेयर बाजार में गिरावट का कारण

मुंबई, तीन सितंबर: कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और सूचना प्रौद्योगिकी शेयरों में बिकवाली के चलते घरेलू शेयर बाजार में बृहस्पतिवार को लगातार चौथे दिन गिरावट आई। बीएसई सेंसेक्स 417 अंक गिरकर 76,152.86 अंक पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 41 अंक की कमी के साथ 23,873.45 अंक पर पहुंच गया।


सेंसेक्स की शुरुआत बढ़त के साथ हुई थी, और यह एक समय 354.13 अंक चढ़कर 76,924.48 अंक के उच्च स्तर पर पहुंच गया। लेकिन बाद में यह अपनी बढ़त खो बैठा।


बाजार की स्थिति और निवेशकों का रुख

वैश्विक बाजारों में सुधार और हाल में विदेशी पूंजी के प्रवाह के बावजूद, निवेशकों के सतर्क रुख के कारण कारोबार के अंतिम घंटे में बाजार में कमजोरी आई। सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में टाइटन, ट्रेंट, आईटीसी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, टेक महिंद्रा, सन फार्मास्युटिकल्स, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, अल्ट्राटेक सीमेंट और बजाज फाइनेंस प्रमुख रूप से नुकसान में रहीं।


वहीं, लाभ में रहने वाले शेयरों में एक्सिस बैंक, अदाणी पोर्ट्स, एशियन पेंट्स, एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लि. और टाटा स्टील शामिल हैं।


कच्चे तेल की कीमतों का प्रभाव

बीएसई में 2,545 शेयर लाभ में रहे, जबकि 1,778 में गिरावट आई। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 1.57 प्रतिशत बढ़कर 97.13 डॉलर प्रति बैरल हो गया। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लि. के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि घरेलू बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण दबाव का कारण बनी हुई है।


उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर सकारात्मक संकेतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लिवाली के बावजूद, लगातार बनी वैश्विक चिंताओं के कारण बाजार में सुधार की कोशिश कमजोर पड़ गई।


छोटी कंपनियों में निवेशकों की रुचि

मानक सूचकांकों में गिरावट के बावजूद, छोटी और मझोली कंपनियों से जुड़े सूचकांकों में तेजी देखी गई। स्मॉलकैप सेलेक्ट सूचकांक 1.02 प्रतिशत चढ़ा, जबकि मिडकैप सेलेक्ट में 0.09 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।


ब्रोकरेज मंच लेमन के शोध प्रमुख गौरव गर्ग ने कहा कि भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहा। मानक सूचकांक शुरुआती बढ़त को बनाए नहीं रख सके और ऊंचे स्तर पर मुनाफावसूली के दबाव में गिरावट के साथ बंद हुए।


वैश्विक बाजारों का रुख

एशिया के अन्य बाजारों में मिला-जुला रुख रहा। हांगकांग के हैंग सेंग और जापान के निक्की में गिरावट आई, जबकि दक्षिण कोरिया का कॉस्पी बढ़त में रहा। यूरोप के प्रमुख बाजारों में भी दोपहर के कारोबार में गिरावट का रुख था।


अमेरिकी बाजार बुधवार को बढ़त के साथ बंद हुए थे। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बुधवार को 6,688.37 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर खरीदे।


घरेलू संस्थागत निवेशकों की लिवाली

घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी 2,812.98 करोड़ रुपये की लिवाली की। बीएसई सेंसेक्स बुधवार को 373.93 अंक टूटकर 76,570.35 अंक पर बंद हुआ था, जबकि एनएसई निफ्टी 141.35 अंक की गिरावट के साथ 23,914.45 अंक पर बंद हुआ।