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भारतीय शेयर बाजार में गिरावट: जानें इसके प्रमुख कारण

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के चलते भारतीय शेयर बाजार में गिरावट आई है। इस सप्ताह सेंसेक्स में 1,600 से अधिक अंकों की कमी आई है, जिससे बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों की मार्केट वैल्यू में भारी कमी आई है। जानें इस गिरावट के पीछे के प्रमुख कारण और अगले सप्ताह में बाजार की दिशा क्या हो सकती है। निवेशकों की नजर कंपनियों के तिमाही नतीजों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर रहेगी।
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शेयर बाजार में गिरावट का प्रभाव


शेयर बाजार में गिरावट: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का भारतीय शेयर बाजार पर नकारात्मक प्रभाव स्पष्ट है। कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि, महंगाई की आशंका और वैश्विक बाजारों में कमजोरी के चलते निवेशक शेयरों की बिक्री कर रहे हैं। शुक्रवार को सेंसेक्स ने लगातार चौथे दिन गिरावट के साथ कारोबार समाप्त किया। पिछले चार कारोबारी सत्रों में बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों की कुल मार्केट वैल्यू लगभग 20.79 लाख करोड़ रुपये कम हो गई। इस सप्ताह सेंसेक्स में 1,600 से अधिक अंकों की गिरावट देखी गई।


सेंसेक्स में भारी गिरावट

सेंसेक्स में गिरावट: शुक्रवार को बीएसई सेंसेक्स 125.56 अंक यानी 0.17 प्रतिशत की कमी के साथ 73,123.83 पर बंद हुआ। इस सप्ताह सेंसेक्स में 1,605.44 अंक यानी 2.15 प्रतिशत की गिरावट आई। 16 अक्टूबर को बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों की मार्केट वैल्यू 4,72,62,167.42 करोड़ रुपये थी, जो चार कारोबारी सत्रों में घटकर 4,51,83,393.14 करोड़ रुपये रह गई। इस प्रकार कुल मार्केट वैल्यू में लगभग 20.79 लाख करोड़ रुपये की कमी आई। मार्केट वैल्यू में गिरावट का अर्थ है कि शेयरों की कीमतों में कमी के कारण कंपनियों का कुल मूल्य घट गया। आइए जानते हैं शेयर बाजार में गिरावट के 5 प्रमुख कारण।


शेयर बाजार में गिरावट के 5 प्रमुख कारण


  1. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंका ने निवेशकों की चिंता को बढ़ा दिया है। ऐसे में निवेशक जोखिम भरे निवेश से दूर रह सकते हैं।

  2. ब्रेंट क्रूड का मूल्य 116.73 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। भारत अपनी आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। महंगे तेल से आयात बिल बढ़ सकता है, जिससे अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ सकता है।

  3. महंगे तेल के कारण परिवहन और उत्पादन की लागत में वृद्धि हो सकती है, जिसका असर कंपनियों के लाभ और आम लोगों के खर्च पर पड़ सकता है।

  4. अमेरिका के शेयर बाजारों में गिरावट का प्रभाव अन्य देशों के बाजारों पर भी पड़ सकता है, जिससे भारतीय निवेशकों का विश्वास कमजोर हुआ है।

  5. रुपये की गिरावट और अमेरिकी बॉंड यील्ड में वृद्धि से विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार कम आकर्षक हो सकते हैं, जिससे बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है。


आगामी सप्ताह में बाजार की दिशा

बाजार की दिशा: अगले सप्ताह में कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजे बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। पेटीएम, टाटा कंज्यूमर, एलएंडटी, मारुति सुजुकी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, अदाणी पोर्ट्स, ट्रेंट, सन फार्मा और BEL जैसी कंपनियों के नतीजों पर निवेशकों की नजर रहेगी। अच्छे नतीजे संबंधित शेयरों को सहारा दे सकते हैं।


इसके अलावा, 27-28 अक्टूबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक से ब्याज दरों के संकेत भी बाजार को प्रभावित कर सकते हैं। जियो प्लेटफॉर्म्स की प्रस्तावित लिस्टिंग को लेकर भी निवेशकों में रुचि बनी रहेगी।


विदेशी निवेशकों की खरीदारी, रुपये की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतें भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगी। यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है और तेल की कीमतें घटती हैं, तो बाजार को राहत मिल सकती है। वहीं, तनाव बढ़ने और तेल महंगा बने रहने पर दबाव जारी रह सकता है।