भारतीय शेयर बाजार में गिरावट: निफ्टी 23,800 के नीचे
वैश्विक घटनाक्रम का असर
बुधवार को भारतीय शेयर बाजार पर वैश्विक घटनाओं का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा गया। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हुई, जिससे महंगाई की चिंता और बढ़ गई। इसके साथ ही, अमेरिकी बॉंड यील्ड में वृद्धि ने निवेशकों पर दबाव डाला, जिसके परिणामस्वरूप निफ्टी महत्वपूर्ण स्तरों से नीचे चला गया।
निफ्टी का गिरना
दोपहर 12:12 बजे सेंसेक्स में 609.74 अंकों की गिरावट आई, जो 76,334.54 पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी भी 222.05 अंकों की कमी के साथ 23,833.75 पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान, निफ्टी 23,800 के मनोवैज्ञानिक स्तर से भी नीचे चला गया। इस व्यापक बिकवाली ने संकेत दिया कि दबाव केवल कुछ विशेष शेयरों तक सीमित नहीं है।
अगला सहारा
निवेशकों की नजर अब 23,600 से 23,800 के क्षेत्र पर है, जो बाजार की अगली दिशा को निर्धारित करेगा। बजाज ब्रोकिंग के अनुसार, यह क्षेत्र पिछले बड़े गैप और जुलाई 2026 के निचले स्तर से जुड़ा हुआ है, जिससे यहां तकनीकी सहारा मिल सकता है। हालांकि, निफ्टी को पिछले दो हफ्तों में 24,380 के उच्च स्तर के ऊपर टिकना आवश्यक है ताकि तेजी की वापसी हो सके।
गिरावट की संभावना
Axis Direct के रिसर्च प्रमुख राजेश पालविया ने बताया कि 24,150 के नीचे निफ्टी कमजोर स्थिति में है। यदि 23,950 का स्तर निर्णायक रूप से टूटता है, तो सूचकांक 23,800 की ओर और गिर सकता है। इसके विपरीत, 24,150-24,200 के ऊपर लगातार कारोबार होने पर बिकवाली का दबाव कम हो सकता है। आने वाले दिनों में कच्चे तेल और मध्य-पूर्व की स्थिति बाजार की दिशा को प्रभावित करेगी।
कच्चा तेल और अमेरिकी यील्ड
ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 1% बढ़कर 95.4 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई, जबकि यह कारोबार के दौरान लगभग छह सप्ताह के उच्च स्तर तक पहुंचा। दूसरी ओर, अमेरिकी 10-वर्षीय बॉंड यील्ड 4.788% के 20 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई। Geojit Investments के वीके विजयकुमार ने चेतावनी दी है कि यदि यह यील्ड 5% तक पहुंचती है, तो वैश्विक इक्विटी बाजार में बड़ी गिरावट का जोखिम बढ़ सकता है। बढ़ती ऊर्जा लागत और ऊंची ब्याज दरें भारतीय शेयरों के लिए भी चुनौती बन सकती हैं।
