भारतीय शेयर बाजार में गिरावट: सेंसेक्स 750 अंक गिरा, निफ्टी 22,600 के नीचे
भारतीय शेयर बाजार की स्थिति
भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत: 28 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। बीएसई सेंसेक्स 750 अंकों से अधिक गिरकर 72,841 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 180 अंकों से अधिक गिरकर 22,563 पर आ गया। इस गिरावट के साथ निफ्टी 22,600 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे चला गया। आईटी शेयरों पर सबसे अधिक दबाव देखा गया, जबकि लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और बजाज ऑटो के शेयरों में बेहतर तिमाही परिणामों के बाद तेजी आई।
सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट का कारण
बुधवार की सुबह सेंसेक्स में 750 अंकों से अधिक की गिरावट आई, और निफ्टी 22,600 के नीचे चला गया। शुरुआती घंटों में बाजार में बिकवाली का दबाव बना रहा। मंगलवार, 27 अक्टूबर को सेंसेक्स 73,598 पर और निफ्टी 22,749 पर बंद हुए थे। इस कमजोरी के पीछे कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले से पहले निवेशकों की सतर्कता प्रमुख कारण हैं।
आईटी शेयरों पर दबाव
बाजार की गिरावट में आईटी सेक्टर के शेयरों का बड़ा योगदान रहा। शुरुआती कारोबार में इंफोसिस का शेयर लगभग 4.5% गिर गया और निफ्टी 50 के प्रमुख लूजर्स में शामिल रहा। HCL टेक्नोलॉजीज में 3.3%, टेक महिंद्रा में 3.1% और TCS में 2.6% की गिरावट आई। आईटी शेयरों में बिकवाली से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता भी आईटी कंपनियों पर दबाव बढ़ा रही है।
L&T और बजाज ऑटो में तेजी
हालांकि, बाजार में व्यापक गिरावट के बावजूद कुछ शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। बेहतर तिमाही नतीजों के बाद लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के शेयरों में शुरुआती कारोबार में लगभग 6% की वृद्धि हुई। बजाज ऑटो के शेयरों में भी लगभग 3% की तेजी आई। इन कंपनियों का प्रदर्शन बाजार के कमजोर रुख से अलग रहा।
कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी फेड पर नजर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत जैसे तेल आयात करने वाले देश के लिए चिंता का विषय हैं, क्योंकि इससे आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव पड़ सकता है। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले से पहले निवेशक सतर्क हैं। ब्याज दरों को लेकर आने वाले संकेतों का असर वैश्विक निवेश प्रवाह और उभरते बाजारों पर पड़ सकता है।
