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भारतीय शेयर बाजार में जोरदार उछाल: सेंसेक्स 1300 अंक बढ़ा, निफ्टी 24300 के पार

गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली, जिसमें सेंसेक्स 1300 अंकों से अधिक उछलकर 78,666 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी ने भी 24,300 का महत्वपूर्ण स्तर पार किया। इस तेजी का मुख्य कारण निवेशकों की खरीदारी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट है। जानें इस उछाल के पीछे के कारण और बाजार की ताजा स्थिति के बारे में।
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शेयर बाजार में तेजी का माहौल


भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को शानदार उछाल का अनुभव किया। कारोबारी सप्ताह के चौथे दिन, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी दोनों ही मजबूती के साथ कारोबार करते नजर आए। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 1300 अंकों से अधिक की वृद्धि के साथ 78,666 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी ने 24,300 का महत्वपूर्ण स्तर पार कर लिया। बाजार में व्यापक खरीदारी ने निवेशकों के उत्साह को बढ़ाया, विशेषकर बैंकिंग, ऑटो और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों में।


सेंसेक्स में 1300 अंकों की बढ़त

गुरुवार को बाजार खुलते ही सेंसेक्स में जोरदार खरीदारी का माहौल बना। निवेशकों की मजबूत लिवाली के चलते प्रमुख इंडेक्स तेजी से ऊपर चढ़ा। सेंसेक्स में 1,364 अंकों की बढ़त ने बाजार की सकारात्मक धारणा को दर्शाया। बड़ी कंपनियों के शेयरों में भी तेजी देखी गई, और बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, फाइनेंस जैसे प्रमुख क्षेत्रों में खरीदारी का माहौल बना। विदेशी निवेशकों की वापसी ने भी घरेलू शेयर बाजार को मजबूती प्रदान की।


निफ्टी ने 24,300 का स्तर पार किया

निफ्टी ने भी गुरुवार को शानदार प्रदर्शन किया। शुरुआती कारोबार में इंडेक्स 24,300 के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर गया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, निफ्टी 374 अंक चढ़कर 24,335 पर पहुंच गया। इस तेजी ने बाजार के व्यापक रुझान के प्रति निवेशकों का विश्वास मजबूत किया। विशेष रूप से बड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी ने इंडेक्स को ऊपर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का प्रभाव

भारतीय शेयर बाजार में तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत भी महत्वपूर्ण रहे। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में गिरावट ने भारतीय बाजार की धारणा को मजबूत किया। 5 नवंबर की सुबह, ब्रेंट क्रूड लगभग 93.50 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। इससे पहले के कारोबारी सत्र में इसमें लगभग 8.7 फीसदी की गिरावट आई थी। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।