भारतीय शेयर बाजार में तेजी: आईटी सेक्टर की खरीदारी से मिली मजबूती
शेयर बाजार में तेजी का माहौल
शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार उछाल देखने को मिला। सेंसेक्स लगभग 800 अंकों की बढ़त के साथ 77,515 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 24,200 के करीब पहुंच गया। इस वृद्धि का मुख्य कारण आईटी क्षेत्र में हुई जोरदार खरीदारी थी, जो टीसीएस (TCS) के शानदार तिमाही परिणामों से शुरू हुई। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कमी और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने भी निवेशकों का विश्वास बढ़ाया।
दोपहर के समय, सेंसेक्स 773 अंकों की बढ़त के साथ 77,515 पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 234 अंक चढ़कर 24,197 पर पहुंच गया। बाजार के अधिकांश सेक्टरों में तेजी का माहौल था, जिसमें निफ्टी आईटी इंडेक्स सबसे आगे रहा। इसके साथ ही स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स में भी अच्छी बढ़त देखी गई।
बाजार में तेजी के प्रमुख कारण
1. आईटी सेक्टर में जोरदार खरीदारी
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के जून तिमाही में शानदार प्रदर्शन ने आईटी सेक्टर के शेयरों को मजबूती प्रदान की। कंपनी का शुद्ध मुनाफा 4.61% बढ़कर 13,349 करोड़ रुपये हो गया। टीसीएस ने यह भी संकेत दिया कि पश्चिम एशिया में तनाव के कारण जो मांग में कमी आई थी, उसमें सुधार की उम्मीद है। इन नतीजों के बाद टीसीएस के शेयरों में 3% से अधिक की वृद्धि हुई, जिससे पूरे आईटी क्षेत्र में रौनक आ गई। कई ब्रोकरेज हाउस भी इस शेयर के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रख रहे हैं।
2. अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत से राहत
वैश्विक स्तर पर निवेशकों का मूड तब बेहतर हुआ जब अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि हालिया भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद ईरान के साथ उनकी बातचीत जारी है। इस कूटनीतिक प्रयास से मध्य पूर्व में विवाद टलने की संभावना जगी, जिससे निवेशकों ने फिर से बाजार में खरीदारी शुरू की।
3. वैश्विक बाजारों में मजबूती
भारतीय शेयर बाजार को एशियाई बाजारों की तेजी से भी समर्थन मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई, चीन का शंघाई कंपोजिट और हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग सभी प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। इससे पहले अमेरिकी शेयर बाजार भी मजबूती के साथ बंद हुए थे। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया भर के निवेशक मौजूदा तनावों के बीच भी आशावादी बने हुए हैं।
4. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
अमेरिकी डॉलर में कमजोरी के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 76.55 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। चूंकि भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में कमी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद है। इससे आयात बिल में कमी आती है और महंगाई पर नियंत्रण होता है।
5. भारतीय रुपये में मजबूती
भारतीय शेयर बाजार में आई तेजी के चलते भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 15 पैसे मजबूत होकर 95.32 पर पहुंच गया। हालांकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक तनाव के कारण रुपये पर दबाव था, लेकिन भारतीय बाजार की मजबूती ने इसे संभाल लिया।
6. इंडिया विक्स में कमी
बाजार में उतार-चढ़ाव और जोखिम को मापने वाला इंडेक्स 'India VIX' लगभग 6% गिरकर 12.63 पर आ गया। इस इंडेक्स में कमी का मतलब है कि निवेशक आने वाले दिनों में बाजार में कम उतार-चढ़ाव की उम्मीद कर रहे हैं, जिससे उनका विश्वास बढ़ा है और बाजार में भागीदारी भी तेज हुई है।
