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भारतीय शेयर बाजार में दीपावली से पहले जोरदार उछाल, निवेशकों की संपत्ति में 7 लाख करोड़ का इजाफा

भारतीय शेयर बाजार ने सोमवार को एक मजबूत रुख के साथ कारोबार समाप्त किया, जिसमें सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। कमोडिटीज और एनर्जी स्टॉक्स ने बाजार को सहारा दिया, जिससे निवेशकों की संपत्ति में 7 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ। हालांकि, कुछ सेक्टर्स में कमजोरी भी देखी गई। जानें इस तेजी के पीछे के कारण और वैश्विक बाजारों का प्रभाव।
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शेयर बाजार में तेजी का माहौल

मुंबई - भारतीय शेयर बाजार ने सोमवार को एक मजबूत रुख के साथ कारोबार समाप्त किया। दिन के अंत में, सेंसेक्स 1,233.25 अंक या 1.66 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 75,692.78 पर और निफ्टी 387.70 अंक या 1.68 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,440.80 पर बंद हुआ।


कमोडिटीज और एनर्जी स्टॉक्स का योगदान

बाजार की इस तेजी को कमोडिटीज और ऊर्जा शेयरों से समर्थन मिला। निफ्टी ऑयल एंड गैस 5.95 प्रतिशत और निफ्टी कमोडिटीज 4.01 प्रतिशत की वृद्धि के साथ शीर्ष लाभार्थी रहे। इसके अलावा, निफ्टी एनर्जी 3.92 प्रतिशत, निफ्टी इन्फ्रा 3.70 प्रतिशत, और निफ्टी मेटल 3.21 प्रतिशत की बढ़त के साथ अन्य प्रमुख सूचकांक रहे। इस सकारात्मक माहौल में, बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप 7 लाख करोड़ रुपये बढ़ गया, जिससे निवेशकों की संपत्ति में भी इजाफा हुआ।


कुछ सेक्टर्स में कमजोरी

हालांकि, निफ्टी मीडिया -0.76 प्रतिशत, निफ्टी आईटी -0.50 प्रतिशत, और निफ्टी प्राइवेट बैंक -0.14 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप भी सकारात्मक रुख के साथ समाप्त हुए। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 682.15 अंक या 1.19 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 57,983.40 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 131.70 अंक या 0.71 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ।


सेंसेक्स में प्रमुख कंपनियों का प्रदर्शन

सेंसेक्स में रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट, और एसबीआई जैसी कंपनियों ने अच्छा प्रदर्शन किया। दूसरी ओर, इन्फोसिस, कोटक महिंद्रा बैंक, और आईसीआईसीआई बैंक जैसी कंपनियों में गिरावट देखी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय शेयर बाजार ने सप्ताह की शुरुआत मजबूत संकेतों के साथ की है, जिसमें बेहतर दूसरी तिमाही के नतीजे और घरेलू स्तर पर सकारात्मक संकेत शामिल हैं।


वैश्विक बाजारों का प्रभाव

वैश्विक स्तर पर भी स्थिति अनुकूल रही, जहां कच्चे तेल की कीमतों में कमी और अमेरिका-ईरान के बीच राजनयिक प्रयासों ने ऊर्जा लागत और भू-राजनीतिक जोखिमों को कम किया। इसके अलावा, विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने भारतीय शेयरों को मजबूती प्रदान की। मिड-कैप और स्मॉल-कैप सूचकांकों में उछाल बाजार में बढ़ती भागीदारी का संकेत है।