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भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव, Sensex और Nifty में गिरावट

मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव देखने को मिला, जिससे Sensex और Nifty में गिरावट आई। शुरुआती बढ़त के बाद, दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में चले गए। IT और वित्तीय शेयरों में गिरावट के साथ-साथ कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक घटनाक्रम भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहे। जानें इस गिरावट के पीछे के कारण और बाजार की संभावित दिशा।
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शुरुआत में बढ़त के बाद बिकवाली का असर


मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार ने सकारात्मक शुरुआत की, लेकिन बाद में बिकवाली ने बाजार पर हावी हो गया। Sensex 329.91 अंक गिरकर 74,529.08 पर और Nifty 85.30 अंक टूटकर 23,329 पर बंद हुआ। IT और वित्तीय शेयरों में दबाव के साथ-साथ कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक घटनाक्रम भी निवेशकों के ध्यान में रहे।


Sensex और Nifty में गिरावट का कारण

बाजार ने मंगलवार को अच्छी शुरुआत की थी, लेकिन ऊपरी स्तरों पर बिकवाली के कारण दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में चले गए। Sensex में 329.91 अंक यानी 0.44 फीसदी की कमी आई, जबकि Nifty 50 भी 85.30 अंक यानी 0.36 फीसदी गिरकर 23,329 पर पहुंच गया। इस गिरावट के साथ लगातार चार सत्रों की तेजी का सिलसिला थम गया।


मार्केट कैप में कमी

गिरावट का असर बाजार की कुल वैल्यू पर भी पड़ा। BSE में सूचीबद्ध कंपनियों का संयुक्त बाजार पूंजीकरण पिछले सत्र के 4,81,58,150.70 करोड़ रुपये से घटकर 4,80,43,172.07 करोड़ रुपये रह गया। इस प्रकार, लगभग 1,14,978.63 करोड़ रुपये की मार्केट कैप कम हुई। IT, वित्तीय और कुछ प्रमुख उपभोक्ता शेयरों में बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ाया।


IT शेयरों में गिरावट, कुछ शेयरों में तेजी

IT सेक्टर में इंडेक्स लगभग 0.9 फीसदी नीचे रहा। TCS, Infosys और HCL Technologies जैसे प्रमुख IT शेयरों में गिरावट देखी गई। वहीं, Bajaj Finserv, Bajaj Finance और Trent भी कमजोर रहे। दूसरी ओर, Eternal में 1.94 फीसदी और IndiGo में 1.58 फीसदी की वृद्धि हुई। Titan और Tata Steel भी बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे।


कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशक

बाजार की दिशा पर कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम का प्रभाव बना हुआ है। मंगलवार को अमेरिकी-ईरान तनाव और संभावित बातचीत के संकेत भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहे। इसके अलावा, Nifty की साप्ताहिक डेरिवेटिव एक्सपायरी ने कारोबार में उतार-चढ़ाव को बढ़ाया। आगे चलकर बाजार की दिशा में कच्चे तेल और भू-राजनीतिक घटनाक्रम महत्वपूर्ण रह सकते हैं।