मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि
मध्य पूर्व में सैन्य तनाव के फिर से बढ़ने का प्रभाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। सोमवार को एशियाई बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हालिया घटनाक्रम के अनुसार, अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए नए सैन्य हमलों और ईरान द्वारा कई देशों की ओर मिसाइलें दागे जाने के कारण निवेशकों में चिंता बढ़ गई है.
ब्रेंट और अमेरिकी कच्चे तेल की कीमतें
ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 4 प्रतिशत की बढ़त के साथ 79 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जो पिछले तीन सप्ताह का उच्चतम स्तर है। इसी तरह, अमेरिकी मानक कच्चा तेल भी लगभग 4.13 प्रतिशत बढ़कर 74.36 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है.
मध्य पूर्व में तनाव की स्थिति
इस सप्ताहांत अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन और ओमान की दिशा में मिसाइल हमले किए। इन घटनाओं ने पूरे मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ा दिया है, जिसका सीधा प्रभाव ऊर्जा बाजारों पर पड़ रहा है.
होरमुज जलडमरूमध्य की स्थिति
इस बीच, होरमुज जलडमरूमध्य को लेकर सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। ईरान का दावा है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को जहाजों की आवाजाही के लिए बंद कर दिया गया है, जबकि अमेरिका का कहना है कि यह मार्ग अभी भी खुला है और सामान्य रूप से संचालित हो रहा है. यह समुद्री मार्ग विश्व के बड़े हिस्से के कच्चे तेल के लिए महत्वपूर्ण है, इसलिए यहां किसी भी बाधा का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है.
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषकों का मानना है कि यदि तनाव बढ़ता है और आसपास के देशों के ऊर्जा प्रतिष्ठान भी प्रभावित होते हैं, तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा दबाव बन सकता है। इससे आने वाले महीनों में कच्चे तेल की कीमतों में और वृद्धि हो सकती है. वर्तमान में, इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में कमी आई है, जिससे आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं.
वैश्विक बाजारों पर प्रभाव
तेल की कीमतों में वृद्धि के साथ-साथ एशिया और यूरोप के शेयर बाजारों में भी गिरावट देखी गई है। इसके अलावा, बॉंड बाजार पर भी दबाव महसूस किया गया है। निवेशकों को चिंता है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसका प्रभाव वैश्विक व्यापार, महंगाई और आर्थिक विकास पर भी पड़ेगा. इस समय, पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच की स्थिति पर है.
