महिलाओं की वित्तीय स्वतंत्रता: डिजिटल लोन और निवेश में बढ़ती भागीदारी
महिलाओं की वित्तीय प्रगति
डिजिटल भारत के युग में, महिलाएं वित्तीय मामलों में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। डीबीएस बैंक इंडिया द्वारा प्रस्तुत 'महिलाएं और वित्त' रिपोर्ट में यह दर्शाया गया है कि भारतीय महिलाएं केवल डिजिटल भुगतान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे लोन, क्रेडिट सुविधाएं और निवेश जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में भी सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं। इस रिपोर्ट में 1,342 महिलाओं के अनुभवों को शामिल किया गया है, जो यह दर्शाता है कि नई तकनीक उनके व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ व्यवसायिक और आर्थिक योजनाओं में भी महत्वपूर्ण हो गई है।
डिजिटल लेनदेन में महिलाओं की भागीदारी
महिला उद्यमियों ने डिजिटल लेनदेन के तरीकों को अपनाकर देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, 84 प्रतिशत महिला उद्यमी डिजिटल भुगतान के तरीकों को पूरी तरह से अपना चुकी हैं, जिसमें यूपीआई सबसे लोकप्रिय विकल्प बन गया है। आंकड़ों के अनुसार, 72 प्रतिशत व्यवसाय करने वाली महिलाएं, 77 प्रतिशत संपन्न महिलाएं और 54 प्रतिशत ग्रामीण महिलाएं नियमित रूप से यूपीआई का उपयोग कर रही हैं। यह दर्शाता है कि डिजिटल तकनीक का उपयोग महिलाओं के बीच तेजी से बढ़ रहा है।
लोन और निवेश में महिलाओं की भूमिका
महिलाएं अब केवल बचत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए लोन भी ले रही हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 38 प्रतिशत महिला उद्यमी अपने कार्य के लिए डिजिटल लोन का सहारा ले रही हैं। इसके अलावा, निवेश के क्षेत्र में भी महिलाएं सक्रिय हो रही हैं, जहां लगभग 29 प्रतिशत महिला उद्यमी विभिन्न प्लेटफार्मों के माध्यम से निवेश कर रही हैं। 28 प्रतिशत संपन्न महिलाएं भी डिजिटल निवेश के साधनों का उपयोग कर रही हैं, जो उनके भविष्य के लिए बेहतर निर्णय लेने की क्षमता को दर्शाता है।
क्रेडिट कार्ड का बढ़ता उपयोग
महिला उद्यमियों के बीच क्रेडिट कार्ड का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है और यह उनकी दैनिक जरूरतों का हिस्सा बन गया है। सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 50 प्रतिशत महिला उद्यमी क्रेडिट कार्ड का उपयोग कर रही हैं, जिनमें से 19 प्रतिशत महिलाएं छोटे खर्चों के लिए भी इसका सहारा लेती हैं। संपन्न महिलाओं में यह आंकड़ा 53 प्रतिशत तक पहुंच गया है। ये महिलाएं क्रेडिट कार्ड के साथ मिलने वाले यात्रा ऑफर्स, जैसे होटल में छूट और एयर माइल्स को बहुत पसंद करती हैं, विशेषकर युवा महिलाओं के बीच इन ऑफर्स को लेकर उत्साह देखा गया है।
खर्च करने की प्राथमिकताएं
महिलाओं के खर्च करने के तरीके और प्राथमिकताएं विभिन्न वर्गों में भिन्न हैं। जो महिलाएं अपना व्यवसाय चला रही हैं, वे अपने खर्च का एक बड़ा हिस्सा अपने व्यवसाय को बढ़ाने में लगाती हैं, जिसमें 65 प्रतिशत खर्च कर्मचारियों की सैलरी, 53 प्रतिशत मार्केटिंग और कंटेंट निर्माण, और 37 प्रतिशत नई तकनीक या सॉफ्टवेयर पर होता है। ग्रामीण महिलाएं अपने खर्च का अधिकांश हिस्सा दैनिक जरूरतों और सामान खरीदने पर करती हैं, जबकि संपन्न महिलाओं के खर्च का दायरा राशन, बिजली-पानी के बिल, स्वास्थ्य सेवाओं और यात्रा पर केंद्रित होता है।
