मारुति सुजुकी के चेयरमैन ने आर्थिक सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया
आर्थिक सुधारों की अपील
नयी दिल्ली, नौ अगस्त: मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) के चेयरमैन आर सी भार्गव ने केंद्र और राज्य सरकारों से आग्रह किया है कि वे आर्थिक सुधारों की गति को तेज करें और व्यापार सुगमता में सुधार के लिए प्रयास बढ़ाएं। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से ऐसे सुधारों का समर्थन करने की अपील की है, जो देश में नए रोजगार और संपत्ति के अवसर उत्पन्न करते हैं। कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 में शेयरधारकों को दिए संदेश में भार्गव ने कहा कि सरकार और विपक्ष को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सुधारों से उत्पन्न अतिरिक्त संसाधनों का उपयोग एक अधिक न्यायपूर्ण और समान समाज के निर्माण में किया जाए।
वाहन उद्योग की संभावनाएं
भार्गव ने बताया कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधारों के बाद भारत के वाहन उद्योग की वृद्धि की संभावनाएं बेहतर हुई हैं। मारुति का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2030-31 तक भारत का कार बाजार 61 लाख से 63 लाख इकाई सालाना तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में छोटी कारों की मांग पिछले पांच वर्षों की तुलना में तेजी से बढ़ सकती है।
बिक्री में वृद्धि
उन्होंने बताया कि 22 सितंबर, 2025 से नई जीएसटी दरें लागू होने के बाद वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी छमाही में मारुति सुजुकी की खुदरा बिक्री में 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मार्च 2026 के अंत में कंपनी के पास लगभग 1.9 लाख लंबित बुकिंग थीं, जिसका मुख्य कारण मांग वाले मॉडल के लिए उत्पादन क्षमता का अपर्याप्त होना था।
उत्पादन में लचीलापन
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंपनी की बिक्री 38 प्रतिशत बढ़ी, जबकि पूरे उद्योग की वृद्धि 28 प्रतिशत रही। इसी अवधि में छोटी कारों की बिक्री में 35 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। भार्गव ने कहा कि कंपनी अब अपनी नई उत्पादन लाइन को अधिक लचीला बना रही है, ताकि मांग के अनुसार इसमें बदलाव किया जा सके।
स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में कदम
भार्गव ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में कहा कि भारत को शुद्ध शून्य उत्सर्जन लक्ष्य हासिल करने के लिए किसी एक प्रौद्योगिकी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि विभिन्न प्रौद्योगिकियों का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने बायोगैस को एक महत्वपूर्ण विकल्प बताते हुए कहा कि इसे स्थानीय संसाधनों से बड़े पैमाने पर तैयार किया जा सकता है।
कृषि में सुधार
इससे आयातित सीएनजी पर निर्भरता कम होगी और स्वच्छ एवं नवीकरणीय ईंधन उपलब्ध कराया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि बायोगैस उत्पादन से जैविक खाद जैसे उपयोगी उप-उत्पाद भी मिलेंगे, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता और कृषि उत्पादकता में सुधार हो सकता है। इसके अलावा, पराली जलाने की समस्या को कम करने, किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में मशीनीकरण को बढ़ावा देने में भी मदद मिल सकती है।
बायोगैस संयंत्रों का निवेश
मारुति सुजुकी पिछले दो वर्षों से भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), पूसा के साथ इस दिशा में काम कर रही है। कंपनी के निदेशक मंडल ने पहले चरण में चार बायोगैस संयंत्र स्थापित करने के लिए 561 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी है। भार्गव ने कहा कि इन संयंत्रों से प्राप्त अनुभव के आधार पर कंपनी भविष्य में बायोगैस के उत्पादन और वितरण में बड़े पैमाने पर निवेश करने की योजना बना सकती है।
