मेटा की जिम्मेदारियों पर सरकार का नया रुख: कानूनी संरक्षण पर सवाल
सरकार का नया दृष्टिकोण
सरकार का मानना है कि जब प्रौद्योगिकी कंपनी मेटा के एल्गोरिद्म किसी सामग्री की पहुंच को बढ़ाने और उसकी दृश्यता को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, तो उसे केवल एक साधारण मध्यस्थ नहीं माना जा सकता। इसके बजाय, वह एक सेवा प्रदाता के रूप में अधिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करती है। यह जानकारी सरकारी सूत्रों ने बुधवार को साझा की।
सूत्रों के अनुसार, सरकार का यह भी मानना है कि ऐसी स्थिति में मेटा को कानूनी संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। हालांकि, कानून की व्याख्या और अंतिम निर्णय न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है। जब इस विषय पर पूछा गया कि क्या मेटा अपना कानूनी संरक्षण खो देती है, तो सूत्रों ने कहा कि इस पर निर्णय अदालत को करना है। उन्होंने कहा, "कानून की अंतिम व्याख्या न्यायपालिका ही करेगी, लेकिन हमारा मानना है कि उन्हें प्रतिरक्षा नहीं मिलनी चाहिए।"
मेटा की जिम्मेदारी स्वीकार करना
मेटा द्वारा अपने प्लेटफार्म पर उपलब्ध सामग्री के संबंध में जिम्मेदारी स्वीकार करना सोशल मीडिया क्षेत्र में उसके दृष्टिकोण में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है। सूत्रों ने कहा कि जब मेटा ने मंच पर मौजूद सामग्री के लिए जिम्मेदारी ली है, तो उसे और भी कई जिम्मेदारियों का पालन करना होगा। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मेटा ने अपनी गलती को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है और बाल शोषण से संबंधित सामग्री की सूचना भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देने का वादा किया है।
बाल सुरक्षा के लिए मेटा की प्रतिबद्धता
मेटा ने बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों की सूचना सीधे भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) द्वारा संचालित साइबर अपराध पोर्टल पर देने पर सहमति जताई है। मेटा के प्रवक्ता ने मंगलवार को कहा कि डिजिटल प्लेटफार्मों पर बच्चों की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है और वे सरकार के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मेटा अमेरिका में मुख्यालय वाली पहली बड़ी प्रौद्योगिकी मध्यस्थ कंपनी है जिसने भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को बाल सुरक्षा मामलों की सूचना देने की व्यवस्था बनाने का वादा किया है।
सरकार की निगरानी और कार्रवाई
इससे पहले, मेटा ऐसे मामलों की सूचना अमेरिका स्थित नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉयटेड चिल्ड्रेन को देती थी। भारत में सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर हानिकारक और अवैध ऑनलाइन सामग्री, विशेष रूप से बाल यौन शोषण सामग्री और डीपफेक के खिलाफ निगरानी बढ़ाई गई है। सरकार ने ऐसी सामग्रियों से निपटने के लिए मेटा को नोटिस जारी किए हैं और कंपनी के वैश्विक अधिकारियों को भारत बुलाया है।
जुलाई में, सरकार और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण सामग्री से संबंधित विज्ञापनों के मामले में मेटा को नोटिस जारी किए थे। इसके बाद मेटा के अधिकारियों के साथ कई दौर की बातचीत हुई, जिसमें सरकार ने स्पष्ट किया कि ऐसी सामग्री कानून का उल्लंघन है और इसे 'सेफ हार्बर' संरक्षण नहीं मिल सकता। एनसीपीसीआर ने इस मामले में औपचारिक जांच शुरू करने का निर्णय लिया है और मेटा इंडिया के अधिकारियों को फिर से तलब किया है।
