रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि: सरकार का बयान और उपभोक्ताओं के लिए राहत
रसोई गैस की कीमतों में हालिया बदलाव
हाल ही में रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि ने आम जनता के बीच चर्चा को बढ़ावा दिया है। इस बीच, केंद्र सरकार ने जानकारी दी है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में भारी उछाल के बावजूद, भारतीय उपभोक्ता कई देशों की तुलना में कम दाम पर रसोई गैस प्राप्त कर रहे हैं।
नई कीमतें और पिछले बदलाव
दिल्ली में 14.2 किलोग्राम के घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो गई है। यह वृद्धि उस समय की गई है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। मार्च में भी घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की वृद्धि की गई थी, जिससे कुल वृद्धि 89 रुपये प्रति सिलेंडर तक पहुंच गई है।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का लाभ
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को राहत प्रदान की गई है। इस योजना के तहत, लाभार्थियों को प्रति सिलेंडर 300 रुपये की सहायता राशि उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी। इसके बाद, उन्हें साल के पहले चार रिफिल पर 642 रुपये प्रति सिलेंडर का भुगतान करना होगा।
अंतरराष्ट्रीय कीमतों का प्रभाव
सरकार का कहना है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष और क्षेत्रीय तनाव के कारण गैस की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी आई है। भारत अपनी गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, और इसकी कीमत सऊदी अरब द्वारा निर्धारित वैश्विक मानक मूल्य से जुड़ी होती है।
वैश्विक मानक मूल्य में वृद्धि
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में गैस का वैश्विक मानक मूल्य लगभग 543 अमेरिकी डॉलर प्रति टन था, जो बाद में बढ़कर 790 अमेरिकी डॉलर प्रति टन तक पहुंच गया है। इस अवधि में लगभग 46 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसका मुख्य कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली आपूर्ति में बाधा और पश्चिम एशिया में बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव है।
वास्तविक लागत और उपभोक्ता मूल्य
वर्तमान में, एक घरेलू गैस सिलेंडर की वास्तविक लागत 1600 रुपये से अधिक है, जबकि उपभोक्ताओं से केवल 942 रुपये लिए जा रहे हैं। सरकार का दावा है कि लागत और बिक्री मूल्य के बीच का बड़ा अंतर सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों और सरकारी सहायता के माध्यम से वहन किया जा रहा है।
घाटे की स्थिति
पिछले वित्त वर्ष के अंत तक घरेलू गैस बिक्री पर कुल घाटा लगभग 60 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया था, जो एक वर्ष पहले 41,338 करोड़ रुपये था। इस बोझ को कम करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों को 30 हजार करोड़ रुपये की सहायता देने की मंजूरी दी है।
भारत की आपूर्ति स्थिति
सरकार ने यह भी कहा है कि पश्चिम एशिया संकट के दौरान भारत उन देशों में शामिल रहा जहां गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति बाधित नहीं हुई। इसके लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाया गया और नए स्रोतों से आयात किया गया।
गैस आयात में वृद्धि
भारत ने अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे देशों से गैस आयात बढ़ाया है। साथ ही, घरेलू उत्पादन में 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की गई है ताकि किसी प्रकार की कमी न हो। सरकार का कहना है कि इन उपायों के कारण देश में रसोई गैस की उपलब्धता प्रभावित नहीं हुई है।
उपभोक्ताओं के लिए संतुलन
सरकार का कहना है कि घरेलू गैस की कीमतों में की गई यह वृद्धि उपभोक्ताओं को वैश्विक कीमत वृद्धि के प्रभाव से बचाने और देशभर में गैस की निर्बाध उपलब्धता बनाए रखने के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है। वर्तमान में, अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति पर सरकार और तेल कंपनियों की नजर बनी हुई है।
