राजस्थान में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार की नई पहल
राजस्थान में प्राकृतिक खेती का विस्तार
जयपुर, 30 जुलाई: राजस्थान में 2 लाख से अधिक किसान लगभग 91,000 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
राज्य सरकार 2.5 लाख किसानों को जोड़कर एक लाख हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की योजना बना रही है, जिससे मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखते हुए टिकाऊ कृषि को प्रोत्साहित किया जा सके। अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत राज्य में अब तक 2,380 क्लस्टर स्थापित किए जा चुके हैं, जो आंध्र प्रदेश के बाद देश में सबसे अधिक हैं। इन क्लस्टरों से 2,12,346 किसान जुड़े हुए हैं, जो आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बाद सबसे अधिक संख्या है।
राज्य में लगभग 91,166 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को अपनाया जा चुका है, जिससे यह राज्य देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। मिशन के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सरकार ने 2025-26 तक लगभग 49.97 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, राज्य सरकार प्राकृतिक खेती को नई दिशा देने के लिए मिशन मोड में कार्य कर रही है।
राज्य में 50,000 किसानों को गोवर्धन जैविक उर्वरक योजना के तहत जैविक खाद उत्पादन के लिए 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। जोधपुर, कोटा और उदयपुर में ऑर्गेनिक फूड मार्केट स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे किसानों को जैविक उत्पादों का बेहतर बाजार मिल सकेगा। इसके अलावा, पारंपरिक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए बैलों से खेती करने वाले किसानों को 30,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
गौ संरक्षण और संवर्धन के लिए 2,856 करोड़ रुपये का अनुदान राज्य की गोशालाओं को दिया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर में सेंटर ऑफ एक्सिलेंस फॉर नैचुरल फार्मिंग की स्थापना का प्रावधान किया गया है, जो अनुसंधान, प्रशिक्षण और नवाचार का प्रमुख केंद्र बनेगा। प्राकृतिक कृषि एक ऐसी पद्धति है जिसमें प्रकृति के अनुरूप खेती की जाती है और मिट्टी, जल, जैव विविधता और सूक्ष्मजीवों के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने पर जोर दिया जाता है।
यह ध्यान देने योग्य है कि राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन 25 नवंबर, 2024 को आरंभ किया गया था, जिसका उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता को कम करना, मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करना और किसानों की आय बढ़ाना है। यह मिशन केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, प्रमाणन और विपणन की समग्र सुविधाएं भी प्रदान करता है। इस मिशन के तहत देशभर में 527 कृषि विज्ञान केंद्र, 76 कृषि विश्वविद्यालय, 194 स्थानीय प्राकृतिक खेती संस्थान और 18 उत्कृष्टता केंद्र किसानों को प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं।
