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रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश ट्रस्ट में कर व्यवस्था में बदलाव

रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश ट्रस्ट में निवेश करने वाले लोगों के लिए कर व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। 2026 में लागू होने वाले इस बदलाव से पात्र निवेशकों को लाभांश पर कर में राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि पूरी राशि कर मुक्त नहीं होगी। निवेशकों को अपनी प्राप्त राशि को सही तरीके से वर्गीकृत करना होगा ताकि वे भविष्य में कर संबंधी समस्याओं से बच सकें। जानें इस नई व्यवस्था के बारे में अधिक जानकारी और इसके संभावित प्रभाव।
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निवेशकों के लिए नई कर व्यवस्था

रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (REITs) और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश ट्रस्ट (InvITs) में निवेश करने वाले लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण कर संबंधी सूचना आई है। 2026 में प्रस्तावित कराधान और अन्य कानून संशोधन विधेयक के तहत लाभांश पर कर प्रणाली में बदलाव की योजना बनाई गई है। लोकसभा द्वारा पारित इस प्रस्ताव से योग्य निवेशकों को न्यासों से मिलने वाले लाभांश पर कर की जटिलताओं से राहत मिलने की संभावना है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि REITs और InvITs से मिलने वाली पूरी राशि कर मुक्त नहीं होगी।


लाभांश और आयकर नियम

यह ध्यान देने योग्य है कि ऐसे न्यासों से मिलने वाली राशि विभिन्न हिस्सों में हो सकती है, जिसमें ब्याज, लाभांश, किराए से होने वाली आय और मूलधन की वापसी शामिल हैं। इन सभी पर आयकर कानून के तहत अलग-अलग नियम लागू होते हैं। इसलिए, निवेशकों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे अपनी पूरी प्राप्त राशि को एक ही मद में न दिखाएं। कर विशेषज्ञ हिमांक सिंगला के अनुसार, ब्याज पर कर निवेशक की कर श्रेणी के अनुसार लगाया जाता है, और आमतौर पर 10 प्रतिशत स्रोत पर कर कटौती होती है। नए बदलाव के तहत योग्य निवेशकों को लाभांश पर कर में राहत मिलेगी।


कर व्यवस्था में प्रस्तावित बदलाव

पहले, लाभांश पर कर की व्यवस्था इस बात पर निर्भर करती थी कि संबंधित कंपनी ने रियायती कर व्यवस्था को अपनाया है या नहीं। यदि कंपनी ने आयकर कानून की धारा 115बीएए के तहत रियायती व्यवस्था का चयन किया था, तो निवेशकों को मिलने वाले लाभांश की कर छूट प्रभावित हो सकती थी। प्रस्तावित बदलाव इस अंतर को समाप्त करने का प्रयास करते हैं। एक अप्रैल 2026 से, पात्र REITs और InvITs के लिए लाभांश पर छूट कंपनी की कर व्यवस्था से अलग हो जाएगी। एम्बेसी रियल एस्टेट निवेश न्यास के CEO अमित शेट्टी ने इसे कर व्यवस्था में समानता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।


किराए से आय और पूंजीगत लाभ

किराए से मिलने वाली आय आमतौर पर निवेशकों के लिए कर मुक्त रहती है। वहीं, मूलधन की वापसी को प्राप्ति के समय आय नहीं माना जाता, लेकिन इससे इकाइयों की खरीद लागत में कमी आती है। भविष्य में इकाइयों की बिक्री पर इससे पूंजीगत लाभ बढ़ सकता है। निवेशकों को दीर्घकालिक और अल्पकालिक पूंजीगत लाभ के नियमों को समझना आवश्यक है। एक साल से अधिक समय तक रखी गई इकाइयों की बिक्री पर 12.5 प्रतिशत की दर से कर लगता है, जबकि कम अवधि में बिक्री पर 20 प्रतिशत की दर लागू होती है। वित्त वर्ष 2025-26 में 1.25 लाख रुपये तक की दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ छूट इन इकाइयों पर उपलब्ध नहीं है।


भारत में निवेश का बढ़ता बाजार

भारत में इस प्रकार के निवेश का बाजार तेजी से विकसित हो रहा है। मार्च 2026 तक, देश में REITs की कुल संपत्ति 2.72 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई थी। वित्त वर्ष 2025-26 में पांच सूचीबद्ध न्यासों ने 8,900 करोड़ रुपये से अधिक का वितरण किया। मई 2026 में बागमाने रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट के सूचीबद्ध होने के बाद बाजार में एक और प्रमुख नाम जुड़ा है।


निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण सलाह

निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नई व्यवस्था को पूरी राशि पर कर छूट के रूप में न देखा जाए। आयकर रिटर्न दाखिल करते समय वितरण विवरण, यानी प्रपत्र 64बी, देखकर राशि के हर हिस्से की अलग पहचान करना आवश्यक है। सही जानकारी के आधार पर कर की गणना करने से भविष्य में गलत विवरण या अतिरिक्त कर भुगतान जैसी स्थिति से बचा जा सकता है।