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रुपये में गिरावट, कच्चे तेल की कीमतों का असर

मंगलवार को रुपये में गिरावट आई, जो कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और डॉलर की मांग के कारण हुई। भारतीय रिजर्व बैंक की नीतियों ने भी चिंता बढ़ाई है। जानें कैसे यह स्थिति शेयर बाजार को प्रभावित कर रही है और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों का क्या असर है।
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रुपये की स्थिति

मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपये ने सात पैसे की गिरावट के साथ 95.68 प्रति डॉलर का स्तर छुआ। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी डॉलर की निरंतर मांग ने घरेलू मुद्रा पर दबाव डाला है। विदेशी मुद्रा व्यापारियों के अनुसार, ब्रेंट कच्चा तेल की कीमत 91 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने से तेल के लिए डॉलर की मांग में वृद्धि हुई है।


आरबीआई की नीतियों का प्रभाव

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा रियायती एफसीएनआर (बी) विदेशी मुद्रा अदला-बदली सुविधा को समय से पहले बंद करने से डॉलर के प्रवाह को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपये की शुरुआत 95.68 प्रति डॉलर पर हुई, जो पिछले बंद स्तर से सात पैसे की कमी दर्शाती है। सोमवार को रुपये ने 19 पैसे की गिरावट के साथ 95.61 पर बंद किया था।


डॉलर सूचकांक और शेयर बाजार

इस बीच, डॉलर सूचकांक, जो दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति को दर्शाता है, 0.01 प्रतिशत गिरकर 99.63 पर पहुंच गया। घरेलू शेयर बाजार में सेंसेक्स ने शुरुआती कारोबार में 278.32 अंक की गिरावट के साथ 77,450.64 अंक पर और निफ्टी ने 57.65 अंक की कमी के साथ 24,230.45 अंक पर कारोबार किया। अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट कच्चा तेल का वायदा भाव 0.52 प्रतिशत बढ़कर 91.34 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।


विदेशी निवेशकों की गतिविधियां

शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने सोमवार को 2,535.10 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिक्री की।