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रेजरपे को 5,000-6,000 करोड़ रुपये के आईपीओ के लिए सेबी से मिली मंजूरी

रेजरपे, एक प्रमुख वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनी, ने 5,000-6,000 करोड़ रुपये के आईपीओ के लिए सेबी से मंजूरी प्राप्त की है। कंपनी का लक्ष्य इस सार्वजनिक निर्गम के माध्यम से लगभग पांच अरब डॉलर का मूल्यांकन हासिल करना है। रेजरपे की स्थापना 2014 में हुई थी और यह भुगतान, बैंकिंग, और अन्य वित्तीय सेवाएं प्रदान करती है। जानें इस कंपनी के बारे में और इसके भविष्य की योजनाओं के बारे में।
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रेजरपे का आईपीओ: सेबी से मिली स्वीकृति

नई दिल्ली, चार नवंबर: वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनी रेजरपे ने 5,000 से 6,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए बाजार नियामक सेबी से मंजूरी प्राप्त कर ली है। इस मामले से जुड़े सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी साझा की। सूत्रों के अनुसार, कंपनी का लक्ष्य सार्वजनिक निर्गम के माध्यम से लगभग पांच अरब डॉलर का मूल्यांकन हासिल करना है।


रेजरपे ने जून में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के समक्ष गोपनीय तरीके से आईपीओ का मसौदा दस्तावेज प्रस्तुत किया था। इस प्रक्रिया के तहत कंपनियां संवेदनशील कारोबारी जानकारी को तुरंत सार्वजनिक किए बिना सेबी के पास दस्तावेजों का मसौदा जमा कर सकती हैं। रेजरपे की स्थापना 2014 में हर्षिल माथुर और शशांक कुमार ने की थी।


यह कंपनी एकीकृत प्लेटफॉर्म के माध्यम से भुगतान स्वीकार करने, बैंकिंग, भुगतान वितरण, वेतन प्रबंधन, ऋण और अन्य वित्तीय सेवाएं प्रदान करती है। रेजरपे को 2020 में 'यूनिकॉर्न' का दर्जा प्राप्त हुआ था। 'यूनिकॉर्न' उस निजी स्वामित्व वाली स्टार्टअप कंपनी को कहा जाता है, जिसका कुल मूल्यांकन एक अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 8,000 करोड़ रुपये या उससे अधिक) हो जाता है और जो सार्वजनिक रूप से शेयर बाजार में सूचीबद्ध नहीं होती है।