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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की सिंगापुर यात्रा: निवेश और व्यापार संबंधों को मजबूत करने की दिशा में कदम

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सिंगापुर में तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा शुरू की है, जिसमें वह देश के शीर्ष नेताओं और वैश्विक निवेशकों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें करेंगी। इस यात्रा का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करना है। सीतारमण सिंगापुर के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य प्रमुख अधिकारियों से मुलाकात करेंगी, साथ ही निवेशकों के साथ संवाद भी करेंगी। यह यात्रा भारत और सिंगापुर के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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सिंगापुर में उच्चस्तरीय बैठकें

नई दिल्ली, 9 अक्टूबर: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर सिंगापुर पहुंचकर महत्वपूर्ण बैठकें शुरू कीं। यह यात्रा 9 से 11 अक्टूबर तक चलेगी, जिसमें वह देश के शीर्ष नेताओं, वैश्विक निवेशकों और उद्योग के प्रमुख व्यक्तियों के साथ संवाद करेंगी। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत करना है।


महत्वपूर्ण मुलाकातें

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, सीतारमण सिंगापुर के राष्ट्रपति थरमन षणमुगरत्नम, प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग, उपप्रधानमंत्री गन किम योंग और विदेश मंत्री विवियन बालकृष्णन से मुलाकात करेंगी। चर्चा का केंद्र भारत-सिंगापुर व्यापक रणनीतिक साझेदारी के प्रमुख क्षेत्रों और भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक (आईएसएमआर) के परिणामों को आगे बढ़ाना होगा। इसमें व्यापार, निवेश, डिजिटल वित्तीय संपर्क, पूंजी बाजार, कराधान, सेमीकंडक्टर, उन्नत विनिर्माण, कौशल विकास और विमानन जैसे विषय शामिल हैं।


सिंगापुर का निवेश

सिंगापुर भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का सबसे बड़ा स्रोत है, जहां से अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच लगभग 194.68 अरब डॉलर का निवेश आया है। सिंगापुर स्थित संस्थागत निवेशक जैसे जीआईसी और टेमासेक ने भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण निवेश किए हैं।


निवेशकों के साथ संवाद

सीतारमण निवेशकों के साथ बातचीत के दौरान ‘हेज फंड और पोर्टफोलियो फंड’ प्रबंधकों के साथ गोलमेज बैठक में भाग लेंगी। इसके अतिरिक्त, वह निवेशकों, वित्तीय संस्थानों और उद्योग के प्रमुख व्यक्तियों के साथ कई सरकार-कारोबार (जी2बी) बैठकें करेंगी। इन बैठकों का उद्देश्य भारत की विकास संभावनाओं, निवेश के अवसरों और वैश्विक आर्थिक परिवर्तनों पर विचारों का आदान-प्रदान करना है।


वैश्विक वित्तीय संस्थानों के साथ बैठकें

वित्त मंत्री प्रमुख वैश्विक वित्तीय संस्थानों, निवेश कंपनियों और स्वास्थ्य सेवा कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आमने-सामने बैठकें भी करेंगी। इनमें गवर्नमेंट ऑफ सिंगापुर इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन (जीआईसी), टेमासेक होल्डिंग्स, डीबीएस बैंक, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक, ब्रिटिश इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट, आईएचएच हेल्थकेयर, मित्सुबिशी यूएफजे फाइनेंशियल ग्रुप के एशिया-प्रशांत कारोबार, बी कैपिटल और एचपीएस इन्वेस्टमेंट पार्टनर्स के सीईओ शामिल हैं। वह स्कैंडिनेविस्का एनस्किल्डा बैंकन की चेयरपर्सन, मित्सुई एंड कंपनी के निदेशक मंडल के एक सदस्य और टीपीजी के कार्यकारी चेयरमैन एवं संस्थापक साझेदार से भी मुलाकात करेंगी।


सिंगापुर के निवेशकों के लिए अवसर

बयान में कहा गया है कि राष्ट्रीय निवेश एवं बुनियादी ढांचा कोष (एनआईआईएफ) और गिफ्ट सिटी जैसे मंच सिंगापुर के निवेशकों के लिए भारत में भागीदारी बढ़ाने के अवसर प्रदान कर सकते हैं। वित्त मंत्रालय संबंधित मंत्रालयों और उद्योग संगठनों के समन्वय से सिंगापुर के इच्छुक निवेशकों को भारतीय कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और राज्य सरकारों से जोड़ने में मदद करेगा, ताकि पहचाने गए निवेश अवसरों को आगे बढ़ाया जा सके। यह यात्रा सिंगापुर के साथ व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और दोनों देशों के राजनीतिक संबंधों को अधिक निवेश, कारोबारी साझेदारी और ठोस आर्थिक परिणामों में बदलने के भारत के प्रयासों को दर्शाती है।