वित्त मंत्री ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में ऋण सुधारने का निर्देश दिया
बैंकों की भूमिका और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में ऋण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को दिए जाने वाले ऋण (पीएसएल) में सुधार करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बैंकों का देश के विकास में एक महत्वपूर्ण स्थान है और उन्हें अपने कुल ऋण का 40 प्रतिशत प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में निवेश करना अनिवार्य है।
इन प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में कृषि, सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) और आवास शामिल हैं। सीतारमण ने बताया कि सरकार की प्राथमिकताओं में किसानों, एमएसएमई लाभार्थियों और कमजोर वर्गों को ऋण उपलब्ध कराना सबसे ऊपर है। उन्होंने कहा, 'हमारा लक्ष्य न केवल ऋण की पहुंच बढ़ाना है, बल्कि प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में दिए जाने वाले ऋण की गुणवत्ता में भी सुधार करना है।'
उन्होंने यह भी कहा कि सफलता का मूल्यांकन केवल संख्यात्मक लक्ष्यों से नहीं, बल्कि यह देख कर होना चाहिए कि ऋण समय पर मिला या नहीं, उसकी मात्रा पर्याप्त थी या नहीं, और उसका उपयोग उत्पादक गतिविधियों में हुआ या नहीं। उन्होंने बैंकों से दलहन और तिलहन उगाने वाले किसानों को ऋण देने में वृद्धि करने का आग्रह किया, जिससे भारत की आयात पर निर्भरता कम हो सके और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिले।
सीतारमण ने सरकारी बैंकों के अधिकारियों से कहा कि प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में ऋण देने के मामले में उनका दृष्टिकोण 'काफी मजबूत' होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कृषि ऋण केवल बड़े किसानों तक सीमित नहीं होना चाहिए, क्योंकि उन्हें ऋण देना आसान होता है। बैंकों को छोटे और सीमांत किसानों तक पहुंच बढ़ानी होगी ताकि वे अपनी उत्पादकता में सुधार कर सकें।
वित्त मंत्री ने कहा कि अंततः लक्ष्य यह होना चाहिए कि लक्षित लाभार्थियों तक वास्तविक और उत्पादक ऋण पहुंचे। प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में ऋण देने को औपचारिक ऋण व्यवस्था को मजबूत करने, ग्राहकों का आधार बढ़ाने और व्यापक आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में ऋण देने पर ध्यान देने और उभरती कमियों की पहचान करने के लिए कहा गया है।
उन्होंने बैंकों और सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों से अपनी संस्थागत क्षमता का लाभ उठाने और बदलती आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक क्षमताएं विकसित करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान वित्तीय सेवा सचिव संजय लोहिया ने कहा कि सम्मेलन ने प्राथमिकताओं की बेहतर पहचान और स्पष्ट कार्रवाई सुनिश्चित करने में मदद की है।
लोहिया ने कहा कि विकसित भारत 2047 की दिशा में आगे बढ़ते हुए, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और सार्वजनिक वित्तीय संस्थान वित्तीय समावेश को बढ़ाने और देश की वृद्धि यात्रा के अगले चरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।
