Newzfatafatlogo

विदेशी निवेशकों की बिकवाली से आईपीओ पर दबाव: अध्ययन के निष्कर्ष

हालिया अध्ययन में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की बिकवाली के आईपीओ शेयरों पर प्रभाव का विश्लेषण किया गया है। यह अध्ययन दर्शाता है कि कैसे बड़े निवेशकों की निकासी से शेयरों की कीमतों में अस्थायी दबाव उत्पन्न होता है, विशेषकर पहली 'अनलॉक' अवधि के आसपास। छोटे आईपीओ में निकासी की उच्च दर भी देखी गई है। जानें इस अध्ययन के महत्वपूर्ण निष्कर्ष और उनके बाजार पर प्रभाव।
 | 

बिकवाली का प्रभाव

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) ने हाल ही में बड़े पैमाने पर बिकवाली की, जिससे आईपीओ शेयरों की कीमतों पर दबाव पड़ा। यह बिकवाली तब हुई जब बड़े निवेशकों के लिए शेयर बेचने की 30 दिन की अवधि समाप्त हुई। वर्तमान नियमों के अनुसार, एंकर निवेशकों को आवंटित शेयरों में 50 प्रतिशत पर 90 दिन और शेष 50 प्रतिशत पर 30 दिन के लिए बिक्री पर रोक होती है। यह जानकारी भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के एक अध्ययन में सामने आई है।


अध्ययन का दायरा

इस अध्ययन में अप्रैल 2022 से अक्टूबर 2025 के बीच सूचीबद्ध 242 'मेनबोर्ड आईपीओ' को शामिल किया गया। इसमें यह भी देखा गया कि छोटे आईपीओ में बड़े निवेशकों की निकासी अधिक रही। अध्ययन के अनुसार, एंकर निवेशकों की निकासी की तीव्रता सबसे अधिक टी+29 से टी+33 की अवधि में देखी गई, जहां कीमतों पर औसतन 3.5 प्रतिशत का नकारात्मक प्रभाव पड़ा।


बिकवाली की तीव्रता

मध्यिका के आधार पर, कीमतों पर प्रभाव और भी अधिक था, जो लगभग छह प्रतिशत की गिरावट तक पहुंच गया। उच्च तीव्रता वाली बिकवाली में एफपीआई ने अपने बड़े आवंटन का औसतन 24.5 प्रतिशत बेचा। इसके बाद कॉरपोरेट निवेशकों ने 23.1 प्रतिशत और अन्य योग्य संस्थागत खरीदारों ने 21.6 प्रतिशत की निकासी की।


लॉक-इन अवधि का प्रभाव

हालांकि, 90 दिन की लॉक-इन अवधि समाप्त होने के बाद, यह दबाव काफी हद तक कम हो गया। निकासी की तीव्रता वाली तीनों श्रेणियों में कीमतों में औसत और मध्यिका बदलाव लगभग शून्य रहा। अध्ययन में यह भी पाया गया कि बड़े निवेशकों की बिकवाली निर्धारित लॉक-इन अवधि के बाद भी जारी रही।


निकासी का कुल आंकड़ा

कुल भारित निकासी टी+30 पर 3.5 प्रतिशत से बढ़कर टी+60 पर 9.3 प्रतिशत, टी+90 पर 18.5 प्रतिशत, टी+180 पर 34.4 प्रतिशत और टी+365 तक 50.7 प्रतिशत हो गई। इससे यह स्पष्ट होता है कि एक साल के भीतर कुल बड़े आवंटन का लगभग आधा हिस्सा बेचा गया।


छोटे आईपीओ में निकासी

मूल्य के संदर्भ में, एफपीआई ने टी+365 तक लगभग 22,474 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे, जबकि उनका कुल बड़ा आवंटन 37,491 करोड़ रुपये था। अध्ययन में यह भी पाया गया कि छोटे आईपीओ में बड़े निवेशकों की निकासी अधिक रही। 0-250 करोड़ रुपये के निर्गम आकार वाली श्रेणी में टी+365 तक 72.5 प्रतिशत निकासी हुई, जबकि 1,001-2,500 करोड़ रुपये के निर्गम आकार वाले आईपीओ में यह 40.8 प्रतिशत रही।


निष्कर्ष

अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि बड़े निवेशकों की बिकवाली मुख्य रूप से पहली 'अनलॉक' अवधि के आसपास अस्थायी आपूर्ति दबाव उत्पन्न करती है, हालांकि इसके बाद इसका प्रभाव कम हो जाता है।