वीकेंड पर शहरी उपभोक्ताओं के खर्च का बढ़ता ट्रेंड
शहरी उपभोक्ताओं का वीकेंड खर्च
कामकाजी लोग, जो सप्ताह के दौरान अपने खर्चों को नियंत्रित रखते हैं, वीकेंड पर अपनी जेबें खोल देते हैं। पीपल रिसर्च ऑन इंडियाज कंज्यूमर इकोनॉमी (PRICE) और टाटा संस द्वारा प्रस्तुत एक नई रिपोर्ट के अनुसार, शहरी उपभोक्ता पूरे सप्ताह में खर्च किए गए धन का लगभग 61.5% केवल शनिवार और रविवार के 48 घंटों में खर्च कर देते हैं।
सप्ताह के दिनों की तुलना में वीकेंड पर खर्च
रिपोर्ट में बताया गया है कि एक सामान्य शहरी उपभोक्ता सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना औसतन 6,724 रुपये खर्च करता है, जबकि वीकेंड पर यह राशि बढ़कर 10,732 रुपये तक पहुंच जाती है। यह दर्शाता है कि लोग आवश्यक वस्तुओं के बजाय घूमने-फिरने, मनोरंजन और लाइफस्टाइल पर अधिक खर्च करते हैं।
वीकेंड पर खर्च की प्राथमिकताएं
वीकेंड में उपभोक्ता अपनी इच्छाओं के अनुसार खर्च करने में सबसे आगे हैं। फैशन और कपड़ों की खरीदारी पर खर्च सामान्य दिनों की तुलना में 2.03 गुना बढ़कर 1,075 रुपये हो जाता है। इसी तरह, मनोरंजन पर खर्च 2.02 गुना बढ़कर 662 रुपये और इलेक्ट्रॉनिक्स पर खर्च 1.99 गुना बढ़कर 695 रुपये हो जाता है।
शहरों में खर्च का अंतर
राजस्थान की राजधानी जयपुर वीकेंड पर खर्च करने में सबसे आगे है, जहां खर्च 2.76 गुना बढ़ता है। इसके बाद सूरत, पुणे और कोच्चि का स्थान है। वहीं, झारखंड का धनबाद एकमात्र ऐसा शहर है जहां वीकेंड पर खर्च 0.92 गुना है, यानी लोग कामकाजी दिनों में अधिक खर्च करते हैं।
आय और खर्च का संबंध
डेटा से यह भी स्पष्ट होता है कि जैसे-जैसे लोगों की आय बढ़ती है, वीकेंड पर उनका खर्च भी बढ़ता है। जिनकी मासिक आय 1 लाख रुपये से अधिक है, वे वीकेंड पर औसतन 21,779 रुपये खर्च करते हैं, जो सामान्य दिनों की तुलना में 2.53 गुना अधिक है। यह प्रवृत्ति विशेष रूप से महिलाओं और शिक्षित परिवारों में देखी गई है।
वीकेंड पर खर्च का सामाजिक प्रभाव
इस रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि वीकेंड पर अधिक खर्च करने की प्रवृत्ति उन परिवारों में अधिक होती है जहां पति-पत्नी दोनों काम करते हैं।
