वेणुगोपाल धूत को दिवालिया घोषित करने का एनसीएलटी का निर्णय
एनसीएलटी का फैसला
मुंबई में स्थित नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने वेणुगोपाल नंदलाल धूत को दिवालिया घोषित कर दिया है। वे वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज के पूर्व प्रमोटर और निदेशक हैं। यह निर्णय भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए लिया गया।
कर्ज की स्थिति
एसबीआई की याचिका में बताया गया है कि वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज और वीडियोकॉन टेलीकम्युनिकेशंस ने एसबीआई और उसके सहयोगी बैंकों से 12,668 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। बाद में इन बैंकों का एसबीआई में विलय हो गया। इस कर्ज के लिए धूत ने व्यक्तिगत गारंटी दी थी। कंपनियों द्वारा कर्ज चुकाने में विफलता के कारण, ब्याज और जुर्माने के साथ कुल बकाया राशि 30 सितंबर 2026 तक 12,668.06 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
दिवाला प्रक्रिया की शुरुआत
एनसीएलटी की दो सदस्यीय पीठ ने एक बैंकरप्सी ट्रस्टी नियुक्त किया है। ट्रिब्यूनल ने ट्रस्टी को निर्देश दिया है कि वह सार्वजनिक नोटिस जारी कर उन सभी व्यक्तियों और बैंकों से कर्ज का विवरण मांगे, जिन्हें धूत से पैसे प्राप्त करने हैं। हालांकि, कार्रवाई शुरू करने से पहले धूत को सात दिन का समय दिया गया है। यदि वे कर्ज चुकाने में असफल रहते हैं, तो उनकी संपत्ति को उनके लेनदारों में बांट दिया जाएगा।
दिवाला आदेश का विवरण
एनसीएलटी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि वेणुगोपाल धूत को दिवालिया घोषित किया गया है। आदेश में कहा गया है, 'व्यक्तिगत गारंटर वेणुगोपाल नंदलाल धूत को दिवालिया घोषित किया जाता है। उनकी संपत्ति लेनदारों के बीच बांटी जाएगी। धूत को इस आदेश की तारीख से सात दिन के भीतर अपनी वित्तीय स्थिति का विवरण बैंकरप्सी ट्रस्टी को सौंपना होगा।'
प्रगति रिपोर्ट की आवश्यकता
पीठ ने बैंकरप्सी ट्रस्टी को 90 दिनों का समय दिया है। ट्रस्टी को तीन महीने के भीतर न्यायाधिकरण और लेनदारों की समिति को प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इसके बाद, उसे हर तिमाही में प्रगति रिपोर्ट देनी होगी। इस पीठ में न्यायिक सदस्य विनय गोयल और तकनीकी सदस्य चरणजीत सिंह गुलाटी शामिल हैं।
मामले का संक्षिप्त विवरण
एनसीएलटी ने अपने 12 पृष्ठों के आदेश में कहा कि धूत के खिलाफ दिवाला कार्यवाही तब तक जारी रहेगी, जब तक उन्हें संहिता की धारा 138 के तहत कर्ज से मुक्त नहीं किया जाता। यह मामला वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड (वीआईएल) से संबंधित है, जिसने एसबीआई और उसके पूर्व सहयोगी बैंकों से कर्ज लिया था। ये बैंक 1 अप्रैल 2017 को एसबीआई में विलय हो गए थे।
कुछ ऋण सुविधाएं वीडियोकॉन टेलीकम्युनिकेशंस लिमिटेड ने सह-देनदार के रूप में ली थीं, लेकिन कंपनी कर्ज चुकाने में असफल रही। एसबीआई की याचिका के अनुसार, 30 सितंबर, 2026 तक कुल बकाया राशि 12,668.06 करोड़ रुपये थी।
