वेदांता का एक अरब डॉलर का निवेश, शून्य कार्बन उत्सर्जन की ओर कदम
वेदांता का कार्बन उत्सर्जन में कमी का प्रयास
(कंपनी के संशोधित बयान के बाद सुधार के साथ जारी)
नई दिल्ली, 19 अगस्त: खनन क्षेत्र की अग्रणी कंपनी वेदांता लिमिटेड ने बुधवार को जानकारी दी कि उसने पिछले पांच वित्तीय वर्षों में शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन की दिशा में एक अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है।
कंपनी ने बताया कि यह निवेश नवीकरणीय ऊर्जा, कम कार्बन वाले ईंधन, ऊर्जा दक्षता और तकनीकी उपायों में किया गया है, जिसका उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन को कम करना है।
वेदांता के अनुसार, इस बदलाव के तहत 2025-26 तक समूह द्वारा नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग सालाना 52 प्रतिशत बढ़कर 400 करोड़ यूनिट तक पहुंच जाएगा, जो लगभग तीन करोड़ भारतीय परिवारों की वार्षिक बिजली खपत के बराबर है।
कंपनी के पास अब लगभग 2,000 मेगावाट की स्थापित और अनुबंधित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता है। इसका लक्ष्य 2030 तक चौबीसों घंटे उपलब्ध 2.5 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता प्राप्त करना है।
बयान में कहा गया है कि इन उपायों और अन्य कार्बन उत्सर्जन कम करने के प्रयासों के माध्यम से 2020-21 से लगभग 3.6 करोड़ टन कार्बन डाईऑक्साइड समतुल्य उत्सर्जन को रोका गया है। इसके अलावा, समूह के धातु और खनन उत्पादन में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की तीव्रता 2020-21 के आधार वर्ष की तुलना में लगभग 14 प्रतिशत कम हुई है।
भारत ने 2030 तक स्वच्छ ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता को 500 गीगावाट तक बढ़ाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही, देश का उद्देश्य अपनी ऊर्जा जरूरतों का 50 प्रतिशत नवीकरणीय स्रोतों से पूरा करना और 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन हासिल करना है।
वेदांता ने कहा कि इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन, पारेषण, बिजली ग्रिड और ऊर्जा भंडारण जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश की आवश्यकता होगी, जिससे इस बुनियादी ढांचे के लिए आवश्यक धातुओं और खनिजों की दीर्घकालिक मांग बढ़ेगी।
