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सरकार की नई योजना: घरेलू पीएनजी कनेक्शन के लिए अतिरिक्त गैस आवंटन

सरकार ने घरेलू रसोई गैस (पीएनजी) के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक नई योजना की घोषणा की है। इस योजना के तहत, नए बिल वाले कनेक्शनों पर 200 मानक घन मीटर अतिरिक्त सस्ती गैस दी जाएगी। यह पहल न केवल गैस की उपलब्धता को बढ़ाएगी, बल्कि महंगी आयातित गैस की खरीद को भी कम करेगी। इसके अलावा, सरकार ने पीएनजी के विस्तार के लिए कई अन्य उपायों की भी घोषणा की है। जानें इस योजना के सभी पहलुओं के बारे में।
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सरकार की पहल से बढ़ेगा घरेलू पीएनजी का उपयोग

सरकार ने शहरी गैस वितरण कंपनियों को रसोई गैस (पीएनजी) के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक नई योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत, हर नए बिल वाले घरेलू पीएनजी कनेक्शन पर 200 मानक घन मीटर (एससीएम) अतिरिक्त सस्ती गैस दी जाएगी। यह योजना एक सितंबर से लागू होगी और इसके तहत योग्य कंपनियों को निर्धारित भौगोलिक क्षेत्र में नए घरेलू कनेक्शन देने पर अतिरिक्त गैस आवंटित की जाएगी।


वर्तमान में, देश में लगभग 1.74 करोड़ घरेलू पीएनजी कनेक्शन हैं। अतिरिक्त गैस आवंटन से शहरी गैस वितरण कंपनियों को महंगी आयातित गैस (एलएनजी) की खरीद में कमी आएगी। इससे घरेलू पीएनजी कनेक्शन पर पूंजीगत खर्च की वसूली की अवधि लगभग 10 साल से घटकर तीन साल होने की संभावना है।


यह प्रोत्साहन योजना दो किस्तों में लागू होगी, जिसमें छह-छह महीने की अवधि होगी। प्रदर्शन अवधि के दौरान, नए बिल वाले कनेक्शन पर 200 एससीएम घरेलू गैस का अतिरिक्त आवंटन किया जाएगा। पश्चिम एशिया में संकट के चलते एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित होने के बाद, सरकार ने पाइप वाली गैस के उपयोग को बढ़ाने पर जोर दिया है।


आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मार्च से अब तक पांच लाख से अधिक पीएनजी कनेक्शन को गैस की आपूर्ति शुरू की जा चुकी है, और 5.7 लाख से अधिक ग्राहकों ने नए कनेक्शन के लिए पंजीकरण कराया है। सरकार ने पीएनजी के विस्तार के लिए नियामकीय बाधाओं को कम करने, गैस पाइपलाइन बिछाने के लिए मार्गाधिकार शुल्क को समान करने और राज्यों से प्राकृतिक गैस पर वैट घटाने का अनुरोध किया है। कुछ राज्यों ने पहले ही वैट में कटौती की है।


पीएनजी की आपूर्ति पाइपलाइन के माध्यम से होती है और उपभोग के अनुसार बिल दिया जाता है। सरकार का कहना है कि इससे गैस सिलेंडर की आवश्यकता कम होती है और यह पारंपरिक ईंधनों की तुलना में अधिक स्वच्छ विकल्प है।