सरकार को विनिवेश से अधिक राशि जुटाने की उम्मीद, आईडीबीआई बैंक की बिक्री महत्वपूर्ण
विनिवेश और परिसंपत्ति मौद्रीकरण से बढ़ती उम्मीदें
सरकार को चालू वित्त वर्ष में विनिवेश और परिसंपत्ति मौद्रीकरण के माध्यम से निर्धारित बजट लक्ष्य से अधिक राशि प्राप्त होने की संभावना है। यह पिछले आठ वर्षों में पहली बार होगा जब ऐसा हो रहा है, जिसमें आईडीबीआई बैंक की 52,878 करोड़ रुपये की रणनीतिक बिक्री की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
विनिवेश का लक्ष्य और अब तक की प्राप्तियां
सरकार ने इस वित्त वर्ष के लिए विनिवेश और परिसंपत्ति मौद्रीकरण से 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। अब तक, नौ सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में हिस्सेदारी की बिक्री, इंडियन मेडिसिन्स फार्मास्युटिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की रणनीतिक बिक्री, और स्पेसिफाइड अंडरटेकिंग ऑफ द यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया (एसयूयूटीआई) से 55,757 करोड़ रुपये जुटाए जा चुके हैं। इसमें भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) और कोल इंडिया जैसी प्रमुख कंपनियों में हिस्सेदारी की बिक्री भी शामिल है।
आईडीबीआई बैंक की रणनीतिक बिक्री की मंजूरी
आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने हाल ही में फेयरफैक्स की अनुषंगी कंपनी मेसर्स 10955230 कनाडा इंक को आईडीबीआई बैंक की रणनीतिक बिक्री के लिए खरीदार के रूप में मंजूरी दी है। इसके तहत सरकार की 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी लगभग 26,620 करोड़ रुपये में और एलआईसी की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी लगभग 26,440 करोड़ रुपये में बेची जाएगी। यह राशि लेनदेन के पूरा होने के बाद सरकारी खजाने में आएगी।
विनिवेश से प्राप्तियों का अनुमान
इस वित्त वर्ष में अब तक विनिवेश से प्राप्त राशि और आईडीबीआई बैंक की प्रस्तावित बिक्री से मिलने वाली रकम को मिलाकर कुल प्राप्तियां 82,000 करोड़ रुपये से अधिक हो जाएंगी। वित्त वर्ष 2023-24 के संशोधित अनुमान के अनुसार, विनिवेश के लिए अलग लक्ष्य तय करने की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है।
पिछले वर्षों के विनिवेश लक्ष्य
हालांकि, विनिवेश और परिसंपत्ति मौद्रीकरण के तहत वित्त वर्ष 2023-24 के संशोधित अनुमान में 30,000 करोड़ रुपये, 2024-25 में 33,000 करोड़ रुपये, 2025-26 में 33,837 करोड़ रुपये और 2026-27 के बजट अनुमान में 80,000 करोड़ रुपये रखे गए थे। पिछले वित्त वर्ष 2021-22 और 2022-23 में सरकार ने क्रमशः 13,534 करोड़ रुपये और 35,294 करोड़ रुपये जुटाए थे, जबकि निर्धारित लक्ष्य 78,000 करोड़ रुपये और 50,000 करोड़ रुपये था।
विनिवेश का ऐतिहासिक संदर्भ
वित्त वर्ष 2018-19 में, सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के विनिवेश से 84,972 करोड़ रुपये जुटाए थे, जबकि उस वर्ष का बजट लक्ष्य 80,000 करोड़ रुपये था।
