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सितंबर में खुदरा महंगाई दर में वृद्धि, खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ीं

सितंबर में भारत में खुदरा महंगाई दर 5.54 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भारी वृद्धि का संकेत है। प्याज, लहसुन और नींबू जैसी वस्तुओं की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर 6.08 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 4.88 प्रतिशत है। भारतीय रिजर्व बैंक के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि महंगाई का लक्ष्य 4 प्रतिशत है। जानें इस पर और क्या प्रभाव पड़ सकता है।
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महंगाई दर में वृद्धि का नया आंकड़ा


भारत में खुदरा महंगाई दर सितंबर में बढ़कर 5.54 प्रतिशत हो गई है। यह नई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) श्रृंखला में पहली बार 5 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई है। 12 अक्टूबर को जारी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में यह दर 4.83 प्रतिशत थी। यह लगातार छठे महीने महंगाई में वृद्धि का संकेत है।


खाद्य महंगाई का घरेलू बजट पर प्रभाव

खाने-पीने की वस्तुओं की महंगाई दर अगस्त में 5.97 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 7.74 प्रतिशत हो गई है। प्याज की कीमतों में सालाना आधार पर 108.09 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि अगस्त में यह 48.78 प्रतिशत थी। लहसुन की महंगाई 54.62 प्रतिशत और नींबू की 36.41 प्रतिशत रही। हालांकि, आलू और टमाटर की कीमतों में क्रमशः 11.50 प्रतिशत और 8.62 प्रतिशत की कमी आई है।


ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई की स्थिति

सितंबर में ग्रामीण क्षेत्रों में खुदरा महंगाई दर 6.08 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो अगस्त में 5.24 प्रतिशत थी। शहरी क्षेत्रों में यह दर 4.31 प्रतिशत से बढ़कर 4.88 प्रतिशत हो गई। तमिलनाडु में महंगाई दर 6.81 प्रतिशत के साथ सबसे अधिक है, इसके बाद ओडिशा (6.70 प्रतिशत), मध्य प्रदेश (6.68 प्रतिशत), तेलंगाना (6.64 प्रतिशत) और आंध्र प्रदेश (6.29 प्रतिशत) का स्थान है।


सेवाओं और अन्य वस्तुओं की महंगाई

व्यक्तिगत देखभाल और अन्य वस्तुओं एवं सेवाओं की महंगाई दर 13.75 प्रतिशत रही। रेस्तरां और आवास सेवाओं की कीमतों में 9.36 प्रतिशत की वृद्धि हुई। परिवहन महंगाई 5.01 प्रतिशत रही, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं में 1.40 प्रतिशत, आवास एवं उपयोगिता सेवाओं में 2.74 प्रतिशत और शिक्षा सेवाओं में 3.94 प्रतिशत की महंगाई दर्ज की गई।


RBI की चुनौती

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का महंगाई लक्ष्य 4 प्रतिशत है, जबकि इसकी स्वीकार्य सीमा 2 से 6 प्रतिशत है। सितंबर की महंगाई दर इस लक्ष्य से ऊपर है, लेकिन फिर भी निर्धारित सीमा के भीतर है। बढ़ती महंगाई के बीच RBI के आगामी निर्णयों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। केंद्रीय बैंक की अगली मौद्रिक नीति बैठक दिसंबर में होने की संभावना है।