सितंबर में भारत में यात्री वाहनों की बिक्री में रिकॉर्ड वृद्धि
भारत में यात्री वाहनों की बिक्री में वृद्धि
मुंबई, 6 अक्टूबर: भारत में सितंबर में यात्री वाहनों की खुदरा बिक्री में सालाना आधार पर 32.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो 4,27,213 इकाइयों के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। इस दौरान कुल वाहनों की खुदरा बिक्री 25,36,920 इकाई रही, जो सितंबर 2025 की तुलना में 31.82 प्रतिशत अधिक है। यह जानकारी उद्योग संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल डीलर्स (फाडा) ने मंगलवार को साझा की।
फाडा के अनुसार, पिछले महीने दोपहिया वाहनों की मांग में 33.08 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो 17,90,188 इकाइयों तक पहुंच गई, जबकि सितंबर 2025 में यह संख्या 13,45,153 इकाई थी। तिपहिया वाहनों की बिक्री में भी 22.25 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो 1,32,570 इकाइयों तक पहुंच गई, जबकि पिछले साल इसी समय यह 1,08,444 इकाई थी। बयान में यह भी कहा गया कि सितंबर 2026 में वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री में सालाना आधार पर 37.62 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो 1,03,557 इकाइयों तक पहुंच गई।
फाडा के अध्यक्ष साई गिरिधर ने कहा, 'सितंबर 2026 भारतीय वाहनों की खुदरा बिक्री के लिए अब तक का सबसे अच्छा सितंबर रहा है। उद्योग ने 25,36,920 इकाइयों की बिक्री की, जो सालाना आधार पर 31.82 प्रतिशत अधिक है।' उन्होंने यह भी बताया कि फाडा की छह में से पांच श्रेणियों में यह अब तक का सबसे अच्छा सितंबर रहा है। इसके साथ ही, किसी भी वित्त वर्ष की पहली छमाही में खुदरा बिक्री का यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।
पहली छमाही की बिक्री में सालाना आधार पर 20.77 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो 1,55,12,319 इकाइयों तक पहुंच गई। गिरिधर ने कहा कि खुदरा बिक्री अगस्त की तुलना में 4.69 प्रतिशत बढ़ी है। सितंबर के असामान्य आधार प्रभाव को अलग रखते हुए, वित्त वर्ष 2026-27 के पहले पांच महीनों में वृद्धि लगभग 17 प्रतिशत रही, जो अधिक वास्तविक अंतर्निहित गति को दर्शाती है।
माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों में कटौती 22 सितंबर 2025 को लागू की गई थी। फाडा ने कहा कि सितंबर में यात्री वाहनों की खुदरा बिक्री अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर रही। शहरी और ग्रामीण बाजारों में बिक्री क्रमशः 32.11 प्रतिशत और 32.09 प्रतिशत बढ़ी, जो दर्शाता है कि दोनों क्षेत्रों में समान वृद्धि हुई है।
फाडा ने यह भी बताया कि ईंधन के मिश्रण में इस महीने एक महत्वपूर्ण संकेत देखने को मिला। अगस्त में पहली बार वैकल्पिक ईंधन की हिस्सेदारी पेट्रोल से अधिक होने के बाद, सितंबर में दोनों लगभग बराबरी पर आ गए। पेट्रोल की हिस्सेदारी मामूली बढ़त के साथ 41.27 प्रतिशत रही, जबकि वैकल्पिक ईंधन की हिस्सेदारी 41 प्रतिशत रही।
इसमें सीएनजी की हिस्सेदारी 23.11 प्रतिशत, हाइब्रिड की 9.44 प्रतिशत और इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की 8.45 प्रतिशत रही। इस प्रकार, अगस्त में वैकल्पिक ईंधन की पेट्रोल से आगे निकलने की स्थिति कोई निर्णायक बदलाव नहीं थी, बल्कि एक महत्वपूर्ण मोड़ थी। अब पेट्रोल और वैकल्पिक ईंधन लगभग बराबरी पर हैं और हर महीने इनमें से किसी एक की हिस्सेदारी आगे रहती है।
इस दौरान ईवी की हिस्सेदारी नए उच्च स्तर पर पहुंच गई, जबकि सीएनजी की हिस्सेदारी में कमी आई। फाडा ने कहा कि कुल मिलाकर अक्टूबर के लिए परिदृश्य 'सावधानी के साथ आशावादी' नजर आ रहा है। त्योहारों के दौरान होने वाली खरीदारी इस रुख को बदलने वाला प्रमुख कारक होगी।
