सुधा मूर्ति का 76वां जन्मदिन: एक प्रेरणादायक जीवन की कहानी
आज, 19 अगस्त को, सुधा मूर्ति अपना 76वां जन्मदिन मना रही हैं। एक प्रेरणादायक महिला, जिन्होंने इंजीनियरिंग में अपनी पहचान बनाई और सामाजिक कार्यों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। जानें उनके जीवन की कुछ रोचक बातें और उनके संघर्षों के बारे में।
| Aug 19, 2026, 10:04 IST
सुधा मूर्ति का जन्मदिन
आज, 19 अगस्त को, इंजीनियर, सामाजिक कार्यकर्ता और लेखक सुधा मूर्ति अपना 76वां जन्मदिन मना रही हैं। वह इंफोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति की पत्नी हैं, जो दुनिया की प्रमुख सॉफ्टवेयर कंपनियों में से एक है। भारत सरकार ने उनके योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया है। आइए, उनके जन्मदिन के अवसर पर उनके जीवन से जुड़ी कुछ दिलचस्प जानकारियों पर नजर डालते हैं...
जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि
सुधा मूर्ति का जन्म 19 अगस्त 1950 को कर्नाटक के शिग्गौन में हुआ। उनके पिता एक सर्जन थे और मां स्कूल की शिक्षिका। उनका पालन-पोषण उनके नाना-नानी ने किया। बचपन से ही वह पढ़ाई में तेज थीं और उन्होंने बीई इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद, उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस से कंप्यूटर साइंस में एमई की परीक्षा उत्तीर्ण की।
यह उल्लेखनीय है कि सुधा के कॉलेज में 600 छात्र थे, जिनमें से 599 लड़के थे और वह अकेली लड़की थीं। उन्होंने कर्नाटक के सभी स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा की शुरुआत करने की सराहनीय पहल की।
सुधा की संघर्ष की कहानी
भारत की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनी टाटा इंजीनियरिंग एंड लोकोमोटिव कंपनी में सुधा मूर्ति पहली महिला इंजीनियर बनीं। उन्होंने डेवलपमेंट इंजीनियर के रूप में काम शुरू किया, लेकिन यह नौकरी पाना उनके लिए आसान नहीं था। जब उन्होंने टेल्को में इस पद के लिए आवेदन किया, तो उन्हें पता चला कि इस पद के लिए महिला उम्मीदवार आवेदन नहीं कर सकतीं।
सुधा ने इस मुद्दे को जे आर डी टाटा के सामने उठाया और अंततः वह कंपनी में नौकरी पाने वाली पहली महिला इंजीनियर बनीं। इसके बाद, उन्होंने वालचंद ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज में सीनियर सिस्टम एनालिस्ट के रूप में कार्य किया और सामाजिक कार्यों तथा साहित्य में भी योगदान दिया।
इंफोसिस की स्थापना
1981 में, सुधा मूर्ति के पति नारायण ने नौकरी छोड़कर अपना व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया। हालांकि, सुधा इस विचार के खिलाफ थीं, लेकिन उन्होंने नारायण को रोकने का प्रयास नहीं किया। उन्होंने अपने पति को 10,000 रुपए उधार दिए, जिनसे नारायण मूर्ति ने अपने 6 दोस्तों के साथ मिलकर इंफोसिस की स्थापना की।
