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सेबी का नया प्रस्ताव: रियल एस्टेट और अवसंरचना निवेश ट्रस्ट के लिए डिपॉजिटरी रसीद जारी करने की अनुमति

भारतीय बाजार नियामक सेबी ने रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (रीट) और सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध अवसंरचना निवेश ट्रस्ट (इनविट) के लिए डिपॉजिटरी रसीद जारी करने का प्रस्ताव रखा है। यह कदम विदेशी निवेशकों के लिए नए निवेश विकल्पों को खोलने और विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के उद्देश्य से है। सेबी ने इस प्रस्ताव पर सुझाव देने के लिए आम जनता से 25 अगस्त तक प्रतिक्रिया मांगी है। जानें इस प्रस्ताव के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
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सेबी का प्रस्ताव

नई दिल्ली, चार अगस्त: भारतीय बाजार नियामक सेबी ने मंगलवार को रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (रीट) और सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध अवसंरचना निवेश ट्रस्ट (इनविट) के लिए डिपॉजिटरी रसीद (डीआर) जारी करने की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा है। इसका मुख्य उद्देश्य विदेशी निवेशकों के लिए निवेश के विकल्पों को बढ़ाना और विदेशी पूंजी को आकर्षित करना है। डिपॉजिटरी रसीद विदेशी निवेशकों को भारतीय कंपनियों या निवेश ट्रस्ट की प्रतिभूतियों में निवेश करने का एक साधन प्रदान करती है।


इस प्रणाली के माध्यम से, विदेशी निवेशक विदेशी मुद्रा में प्रतिभूतियों में निवेश कर सकते हैं। प्रस्तावित योजना के अनुसार, रीट और सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध इनविट को स्वीकृत विदेशी क्षेत्रों में डीआर जारी करने की अनुमति दी जाएगी, जिससे विदेशी निवेशक अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजार में विदेशी मुद्रा में कारोबार कर सकेंगे।


हालांकि, सेबी ने निजी रूप से सूचीबद्ध इनविट को इस प्रस्ताव से बाहर रखने का सुझाव दिया है। नियामक ने अपने परामर्श पत्र में कहा कि रीट और इनविट की यूनिट के लिए डीआर जारी करने की प्रक्रिया उन्हें अनुमति प्राप्त क्षेत्रों में डिपॉजिटरी रसीद जारी करने में सक्षम बनाएगी, जिससे विदेशी निवेशकों को एक अतिरिक्त निवेश विकल्प मिलेगा। सेबी ने यह भी कहा कि यह विदेशी निवेशकों के लिए फायदेमंद होगा, क्योंकि डीआर उन्हें अनुमति प्राप्त अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विदेशी मुद्रा में कारोबार करने की सुविधा प्रदान करते हैं।


इससे रीट और इनविट में विदेशी पूंजी को आकर्षित करने में मदद मिलेगी। वर्तमान में, रीट और इनविट की यूनिट भारतीय रुपये में मूल्यांकित होती हैं और भारत में मान्यता प्राप्त शेयर बाजारों में सूचीबद्ध होती हैं। ये ट्रस्ट भारतीय रिजर्व बैंक और सरकार द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के अधीन विदेशी निवेशकों को यूनिट जारी कर सकते हैं। सेबी ने बताया कि रीट और इनविट की यूनिट डिपॉजिटरी रसीद योजना, 2014 के तहत 'अनुमति प्राप्त प्रतिभूतियों' की श्रेणी में आती हैं।


इसके अतिरिक्त, विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गैर-ऋण साधन) नियम, 2019 के तहत भारत से बाहर रहने वाले व्यक्तियों को रीट और इनविट यूनिट में निवेश की अनुमति है। मौजूदा डीआर योजना और विदेशी निवेश नियम रीट और इनविट यूनिट के बदले डीआर जारी करने की अनुमति देते हैं। हालांकि, वर्तमान में सेबी के रीट और इनविट नियमों के तहत ऐसी व्यवस्था के लिए कोई प्रावधान या रूपरेखा मौजूद नहीं है।


इस कमी को दूर करने के लिए, सेबी ने रीट और इनविट विनियमन में नए प्रावधान जोड़ने का प्रस्ताव किया है, जिससे रीट और सार्वजनिक रूप से पेश किए गए इनविट की यूनिट के बदले डीआर जारी किए जा सकेंगे। इसके लिए नियामक द्वारा निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन करना आवश्यक होगा।


सेबी ने इन प्रस्तावों पर 25 अगस्त तक आम जनता से सुझाव मांगे हैं।