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सेबी की नई पहल: विदेशी निवेशकों के लिए नियमों की समीक्षा

सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए अनुपालन नियमों की समीक्षा करने की योजना की घोषणा की है। यह कदम भारत के पूंजी बाजारों के विस्तार और निवेशकों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है। पांडेय ने बताया कि मौजूदा नियमों को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने के लिए एक परामर्श पत्र जारी किया जाएगा। इसके साथ ही, उन्होंने नए शेयर बाजारों की संभावनाओं और बाजार के विकास के लिए घरेलू बचत के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
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नियामक की नई दिशा

(फाइल फोटो के साथ) मुंबई, 28 अक्टूबर: सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने बुधवार को बताया कि नियामक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए अनुपालन नियमों की समीक्षा करेगा। इसके तहत, नियमों को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने के लिए एक परामर्श पत्र जारी किया जाएगा। इस प्रक्रिया में निवेशकों के संरक्षण और बाजार की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आवश्यक सुरक्षा उपायों को भी ध्यान में रखा जाएगा। पांडेय ने यह स्वीकार किया कि भारत में अनुपालन संबंधी कुछ आवश्यकताएं अन्य देशों की तुलना में अधिक सख्त हैं।


निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश

घरेलू बाजारों में विदेशी निवेशकों की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए मौजूदा नियमों की समीक्षा की जा रही है। पांडेय ने ‘बिजनेस स्टैंडर्ड बीएफएसआई इनसाइट्स शिखर सम्मेलन’ में कहा, "हम मानते हैं कि भारत में अनुपालन संबंधी कुछ आवश्यकताएं अन्य प्रमुख देशों के मुकाबले अधिक सख्त हैं। हम इन आवश्यकताओं की समीक्षा कर रहे हैं और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने के लिए सुझाव मांगने के लिए एक परामर्श पत्र जारी करेंगे।"


नए शेयर बाजारों की संभावनाएं

पांडेय ने शेयर बाजारों को अपने मंच पर सूचीबद्ध होने की अनुमति देने के सवाल पर कहा कि यह मुद्दा विचाराधीन है। कई वैश्विक बाजारों में ऐसा किया जाता है, लेकिन भारत में कई शेयर बाजारों के होने और संभावित हितों के टकराव को देखते हुए यह व्यवस्था अलग है। उन्होंने कहा, "शेयर बाजार एक नियामक भी है। यदि उसके अपने शेयर में कारोबार हो रहा है, तो जाहिर है कि वह अपने ही मामले में नियामक नहीं हो सकता।"


बाजार के विकास की दिशा

पांडेय ने कहा कि बाजार के विकास के लिए घरेलू बचत एक महत्वपूर्ण आधार बनी रहेगी, जबकि अंतरराष्ट्रीय भागीदारी से पूंजी की उपलब्धता और विशेषज्ञता में वृद्धि हो सकती है। उन्होंने बताया कि भारत में बाजार पूंजीकरण और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का अनुपात वित्त वर्ष 2015-16 के 69 प्रतिशत से बढ़कर अब लगभग 130 प्रतिशत हो गया है।


बॉण्ड बाजार की स्थिति

कंपनियों के बकाया बॉण्ड का मूल्य लगभग 61 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो बैंकों द्वारा उद्योग और सेवा क्षेत्र को दिए गए कर्ज का लगभग 55 प्रतिशत है। पांडेय ने कहा कि बाजार के विकास के अगले चरण में कारोबारियों के लिए वित्तपोषण के अवसर बढ़ाने, निवेशकों की भागीदारी का विस्तार करने और बाजारों को निष्पक्ष और मजबूत बनाए रखने पर ध्यान दिया जाएगा।