सेबी ने एफपीआई के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाया
एफपीआई के लिए नई पंजीकरण प्रक्रिया
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को और अधिक सुगम बना दिया है। अब एफपीआई अपने 'संरक्षक' को डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित पावर ऑफ अटॉर्नी (पीओए) देने की अनुमति प्राप्त कर चुके हैं। सेबी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि संशोधित नियमों के अनुसार, एफपीआई अपने कस्टोडियन के पक्ष में पीओए जारी कर सकता है। इस दस्तावेज में एफपीआई का पता होना आवश्यक है और इसे सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत डिजिटल हस्ताक्षर के माध्यम से मान्यता प्राप्त किया जा सकता है।
पीओए एक ऐसा दस्तावेज है जो एफपीआई को अपने कस्टोडियन को उसकी ओर से कार्य करने के लिए अधिकृत करता है। कस्टोडियन एक वित्तीय संस्था होती है, जो निवेशकों की प्रतिभूतियों और संपत्तियों की सुरक्षा और प्रबंधन का कार्य करती है। सेबी ने बताया कि यह कदम एफपीआई पंजीकरण प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के लिए उसके निरंतर प्रयासों का हिस्सा है।
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सेबी ने पहले भी एफपीआई पंजीकरण, पैन, बैंक और डीमैट खातों के लिए साझा आवेदन फॉर्म (सीएएफ), पंजीकरण दस्तावेजों पर भारतीय डिजिटल हस्ताक्षर की अनुमति और सीएएफ पोर्टल में डिजिटल हस्ताक्षर की सुविधा जैसी कई पहल की हैं। इस परिपत्र के प्रावधान 20 अगस्त, 2026 से लागू होंगे।
