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सेबी ने कॉरपोरेट बॉंड के लिए नई टोकन व्यवस्था ‘डीमैट 2.0’ की शुरुआत की

सेबी ने कॉरपोरेट बॉंड के लिए नई टोकन व्यवस्था ‘डीमैट 2.0’ की शुरुआत की है, जो लेनदेन के त्वरित निपटान की सुविधा प्रदान करेगी। इस प्रणाली में डिजिटल टोकन का उपयोग किया जाएगा, जिससे स्वामित्व और निपटान रिकॉर्ड को सुरक्षित और सरल बनाया जा सकेगा। इसके साथ ही, नई यूपीआई सुविधाएँ भी ग्राहकों के लिए पेश की गई हैं। जानें इस नई व्यवस्था के लाभ और वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत की स्थिति।
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नवीनतम टोकन व्यवस्था का उद्घाटन

बाजार नियामक सेबी ने हाल ही में कॉरपोरेट बॉंड के लिए एक नई टोकन व्यवस्था, जिसे ‘डीमैट 2.0’ कहा गया है, की शुरुआत की। यह प्रणाली लेनदेन के त्वरित और समवर्ती निपटान की सुविधा प्रदान करेगी। ‘डीमैट 2.0’ भारतीय रिजर्व बैंक की थोक केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) से संबंधित है।


प्रौद्योगिकी का उपयोग

इस परियोजना में रिजर्व बैंक के एकीकृत बाजार इंटरफेस (यूएमआई) का उपयोग किया गया है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा और सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने एक वैश्विक फिनटेक सम्मेलन में इस पहल की घोषणा की। इस अवसर पर, मल्होत्रा ने ग्राहकों के लिए दो नई एकीकृत भुगतान प्रणाली (यूपीआई) सुविधाओं का भी अनावरण किया।


नई भुगतान प्रणाली की विशेषताएँ

इन सुविधाओं में बिक्री केंद्रों पर ‘यूपीआई टैप एंड पे’ और ‘माईयूपीआई’ शामिल हैं, जो ग्राहक सहायता के लिए राष्ट्रीय भुगतान निगम की लघु मॉडल पर आधारित है। सेबी ने बताया कि ‘डीमैट 2.0’ एक नई बाजार अवसंरचना है, जो कॉरपोरेट बॉंड के जारी करने, रखने, कारोबार करने और निपटान के नए तरीकों का परीक्षण करने के लिए विकसित की गई है।


डिजिटल टोकन का महत्व

इस प्रणाली में बॉंड को वितरित बही-खाते तकनीक पर एक डिजिटल टोकन के रूप में बनाया जाता है। यह एक साझा इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख है, जिसे बाजार से जुड़ी संस्थाएं एक साथ बनाए रखती हैं। बॉंड से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड को डिपॉजिटरी द्वारा सुरक्षित रखा जाता है।


टोकन व्यवस्था के लाभ

टोकन व्यवस्था के तहत जारी कॉरपोरेट बॉंड पारंपरिक कंपनी ऋण प्रतिभूतियों की तरह होते हैं, लेकिन इनके स्वामित्व और निपटान रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से प्रबंधित किया जाता है। सेबी ने कहा कि ‘डीमैट 2.0’ तत्काल निपटान की सुविधा प्रदान करता है, जिससे बॉंड और धनराशि एक साथ हस्तांतरित होती हैं।


स्मार्ट अनुबंधों का उपयोग

इस तकनीक में स्मार्ट अनुबंधों का उपयोग किया जाता है, जो बही-खाते में दर्ज निर्देश होते हैं और अपने आप लागू होते हैं। साझा बही-खाते में बॉंडधारक की जानकारी सभी अधिकृत संस्थाओं को उपलब्ध होती है, और देय तिथि पर भुगतान सीधे बॉंडधारकों के खातों में पहुंच जाता है।


वैश्विक परिप्रेक्ष्य

सेबी ने बताया कि कई देशों में टोकन व्यवस्था के प्रयोग शुरू हो चुके हैं, लेकिन भारत पहला देश है जहां कॉरपोरेट बॉंड को वितरित बही-खाते तकनीक पर जारी किया गया है।


प्रारंभिक सफलताएँ

अब तक, तीन कंपनियों—आरईसी, एलएंडटी और आईआईएफएल—ने इस व्यवस्था के तहत कुल 1,025 करोड़ रुपये के बॉंड जारी किए हैं। सेबी ने कहा कि यह प्रायोगिक परियोजना चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाई जा रही है। ‘यूपीआई टैप एंड पे’ सुविधा के तहत उपयोगकर्ता अपने स्मार्टफोन के माध्यम से तेजी से भुगतान कर सकेंगे।


भविष्य की योजनाएँ

एनएफसी तकनीक का उपयोग करते हुए, यह सुविधा रोजमर्रा के भुगतान को सरल और तेज बनाने का लक्ष्य रखती है। इसके अलावा, ‘माईयूपीआई’ प्रणाली में नई सुविधाएँ जोड़ी जाएंगी, जिससे यूपीआई व्यवस्था में भरोसा और सुरक्षा बढ़ेगी।


उपस्थित लोग

इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय भुगतान निगम के गैर-कार्यकारी चेयरमैन अजय कुमार चौधरी और अन्य वरिष्ठ बैंक अधिकारी, फिनटेक कंपनियों के संस्थापक और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े लोग भी शामिल थे।