सेबी ने निरीक्षण प्रक्रिया को सरल बनाया, 2026-27 के लिए लक्ष्य घटाया
सेबी का नया निरीक्षण ढांचा
नई दिल्ली, 7 अगस्त: बाजार नियामक सेबी ने शुक्रवार को बाजार मध्यस्थों के निरीक्षण को सुव्यवस्थित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब शेयर बाजारों और डिपॉजिटरी संस्थानों द्वारा संयुक्त निरीक्षण अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही, 2026-27 के लिए निरीक्षण लक्ष्य को पिछले वर्ष की तुलना में लगभग एक-तिहाई कम कर दिया गया है। यह नया ढांचा बाजार अवसंरचना संस्थानों, निवेश सलाहकारों और शोध विश्लेषकों के पर्यवेक्षी निकाय के साथ विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है और इसे वित्त वर्ष 2026-27 से लागू किया जाएगा।
सेबी ने बताया कि शेयर ब्रोकरों, डिपॉजिटरी प्रतिभागियों, निवेश सलाहकारों और शोध विश्लेषकों का नियमित निरीक्षण पहले से ही शेयर बाजारों और डिपॉजिटरी द्वारा किया जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए, सेबी ने अपने निरीक्षण लक्ष्य को युक्तिसंगत बनाते हुए घटाने का निर्णय लिया है।
सेबी के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य जोखिम-आधारित दृष्टिकोण के माध्यम से निगरानी को मजबूत करना और कारोबार की सुगमता को बढ़ावा देना है, ताकि अनावश्यक और बार-बार के निरीक्षण से बचा जा सके। इसके साथ ही, सेबी ने यह भी निर्णय लिया है कि नियमों का पालन करने वाली संस्थाओं, विशेषकर योग्य शेयर ब्रोकरों के लिए हर वर्ष होने वाले व्यापक निरीक्षण अब समाप्त किए जाएंगे।
हालांकि, अधिक जोखिम वाले संस्थाओं या जिनके खिलाफ बार-बार संकेत मिलते हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर जांच के दायरे में रखा जाएगा। इसके अलावा, जिन संस्थाओं के पास विभिन्न प्रकार के पंजीकरण हैं, उनका निरीक्षण सेबी के विभिन्न विभाग मिलकर संयुक्त रूप से करेंगे, ताकि एक ही वर्ष में बार-बार निरीक्षण की आवश्यकता न पड़े। अब निरीक्षण के लिए संस्थाओं का चयन तिमाही आधार पर किया जाएगा, जिसमें शेयर बाजारों से मिलने वाले संकेत, निवेशकों की शिकायतें और सोशल मीडिया से प्राप्त इनपुट भी शामिल होंगे।
सेबी ने यह भी कहा कि बाजार खुफिया जानकारी, क्षेत्रीय और स्थानीय कार्यालयों से मिले संकेतों के आधार पर भी जांच शुरू की जाएगी। इसमें तकनीकी गड़बड़ियां, साइबर घटनाएं और शेयर दलालों के अधिकृत प्रतिनिधियों से जुड़े मामले शामिल हो सकते हैं।
