सेबी ने शेयर बाजार में पुनर्खरीद के नियमों को फिर से लागू किया
नए नियमों की घोषणा
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने हाल ही में एक अधिसूचना जारी की है, जिसमें शेयर बाजार के माध्यम से खुले बाजार में शेयर की पुनर्खरीद (बायबैक) की प्रक्रिया को फिर से लागू करने के नियमों की जानकारी दी गई है। कंपनियां एक अगस्त से अपने शेयरों की पुनर्खरीद कर सकेंगी, और इस प्रक्रिया की अधिकतम अवधि 66 कार्य दिवसों तक सीमित होगी।
सेबी के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, कंपनियां बिना किसी विशेष 'पुनर्खरीद खिड़की' के माध्यम से नियमित कारोबार के तहत पुनर्खरीद कर सकेंगी। इसका मुख्य उद्देश्य प्रक्रिया को सरल बनाना और कार्यान्वयन में दक्षता बढ़ाना है।
पुनर्खरीद का महत्व
इस कदम से सूचीबद्ध कंपनियों के लिए पुनर्खरीद को एक पूंजी आवंटन के साधन के रूप में और अधिक आकर्षक बनाने की कोशिश की जा रही है। सेबी ने 2025 में इस व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर दिया था, क्योंकि उस समय शेयरधारकों के साथ भेदभाव और कर संबंधी मुद्दों पर चिंता जताई गई थी।
अब पुनर्खरीद की प्रक्रिया के पुनः शुरू होने से कंपनियों को शेयरधारकों को अतिरिक्त नकदी लौटाने और बाजार में कमजोरी के समय में शेयर की कीमतों को स्थिर करने में मदद मिलेगी।
नए नियमों की विशेषताएँ
सेबी ने एक जुलाई की अधिसूचना में बताया कि एक अगस्त 2026 से प्रभावी होने वाले नियमों के तहत, पुनर्खरीद कंपनी की चुकता पूंजी और मुक्त भंडार के 15 प्रतिशत से कम होगी। यह गणना कंपनी के एकल और समेकित वित्तीय विवरणों के आधार पर की जाएगी।
इसके अलावा, पुनर्खरीद की प्रक्रिया को पेशकश की तारीख से 66 कार्य दिवस के भीतर पूरा करना होगा, जबकि पहले यह अवधि अधिकतम छह महीने तक हो सकती थी।
पुनर्खरीद की प्रक्रिया में बदलाव
सेबी ने कहा है कि पुनर्खरीद के लिए 'मर्चेंट बैंकर' की नियुक्ति अब कंपनी के विवेक पर निर्भर करेगी। यदि कोई कंपनी 'मर्चेंट बैंकर' नियुक्त नहीं करती है, तो उसके कार्यों को कंपनी, अनुपालन अधिकारी, वैधानिक लेखा परीक्षक, सचिवीय लेखा परीक्षक और शेयर बाजारों को सौंपा जाएगा।
शेयरधारकों के साथ बेहतर संवाद के लिए, सेबी ने कहा कि पुनर्खरीद की जानकारी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भी शेयरधारकों तक पहुंचाई जाएगी।
कराधान ढांचे में बदलाव
नए कराधान ढांचे के तहत, सार्वजनिक शेयरधारकों पर पुनर्खरीद में शेयर बेचने पर उनके वास्तविक पूंजीगत लाभ के आधार पर कर लगाया जाएगा। यह प्रक्रिया सामान्य शेयर बिक्री के समान होगी।
इससे पहले पुनर्खरीद में भाग लेने वाले और न लेने वाले शेयरधारकों के बीच कर संबंधी लाभ का अंतर समाप्त हो जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप
सेबी ने यह भी बताया कि शेयर बाजार के माध्यम से पुनर्खरीद की व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक रूप से अपनाई जाती है। इसके अलावा, कंपनियों के प्रवर्तकों या सहयोगियों के पास मौजूद शेयर पुनर्खरीद अवधि के दौरान स्थिर रहेंगे।
सेबी ने यह सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट प्रावधान जोड़ा है कि कंपनियां ऐसी पुनर्खरीद घोषणा न करें जिससे न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता के मानकों का उल्लंघन हो।
