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सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना

हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में कमी के चलते सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इनकी कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। जानें कि क्या ये धातुएं 2025 के स्तर पर वापस लौटेंगी और इसके पीछे के कारण क्या हैं।
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पश्चिम एशिया की स्थिति और अमेरिकी ब्याज दरें


सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव की संभावना


हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में कमी आई है, जिसके चलते सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखी गई है। अब यह जानना महत्वपूर्ण है कि क्या यह गिरावट जारी रहेगी या ये धातुएं 2025 के स्तर पर वापस लौटेंगी। बाजार के विशेषज्ञों की राय इस विषय पर भिन्न है।


विशेषज्ञों का मानना है कि सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। इसकी मुख्य वजह अमेरिकी ब्याज दरों में अनिश्चितता, मजबूत डॉलर और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम हैं। पिछले सप्ताह सोने की कीमत नवंबर 2025 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई थी।


इस साल कीमती धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव

इस वर्ष सोने और चांदी की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोने की कीमत लगभग 1.33 लाख रुपये थी, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.79 लाख रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। इसके बाद कीमतों में गिरावट आई और अब सोना लगभग 36 हजार रुपये सस्ता हो चुका है। चांदी की कीमत भी 2.30 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 3.86 लाख रुपये तक पहुंची थी, लेकिन अब यह लगभग 1.69 लाख रुपये सस्ती हो चुकी है।


कीमतों में कमी के कारण

सर्राफा बाजार के जानकारों के अनुसार, सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण अमेरिका-ईरान समझौता है। इस समझौते के बाद पश्चिम एशिया में तनाव कम हुआ, जिससे सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग में कमी आई। इसी कारण सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई। शनिवार को सोने और चांदी की कीमतों में हल्की बढ़त देखी गई, जिसका कारण अमेरिका के महंगाई के आंकड़े रहे। इन आंकड़ों के बाद बाजार में यह उम्मीद बनी कि फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना कम हो सकती है, जिससे सोने की खरीदारी को समर्थन मिला।