सोने की कीमतों में गिरावट: अमेरिकी डॉलर और भू-राजनीतिक तनाव का प्रभाव
बुधवार को सोने की कीमतों में गिरावट आई, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय कीमत तीन सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गई। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने महंगाई की चिंताओं को बढ़ा दिया है, जिससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है। इस स्थिति का सोने की मांग पर सीधा प्रभाव पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च ब्याज दरें सोने के लिए नकारात्मक हो सकती हैं। बाजार की नजर अब अमेरिका के रोजगार आंकड़ों पर है, जो केंद्रीय बैंक के अगले फैसले को प्रभावित कर सकते हैं।
| Sep 2, 2026, 21:50 IST
सोने की कीमतों में गिरावट
बुधवार को सोने की कीमतों में कमी आई, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय कीमत तीन सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गई। अमेरिका और ईरान के बीच जुलाई के बाद सबसे बड़े सैन्य टकराव ने बाजार में महंगाई की चिंताओं को बढ़ा दिया है। इसके परिणामस्वरूप अमेरिकी डॉलर में मजबूती आई, जिसने सोने की कीमतों पर दबाव डाला और निवेशकों की धारणा को कमजोर किया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की स्थिति
वर्तमान जानकारी के अनुसार, बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की हाजिर कीमत 4,330.79 डॉलर प्रति औंस थी। कारोबार के दौरान यह 7 अगस्त के बाद सबसे निचले स्तर 4,330 डॉलर के आसपास पहुंच गया। अमेरिकी सोने के वायदा भाव में भी 0.4 प्रतिशत की गिरावट आई, जिससे दिसंबर आपूर्ति वाला सौदा 4,377.90 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।
भू-राजनीतिक तनाव का प्रभाव
सोने को आमतौर पर आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के समय सुरक्षित निवेश माना जाता है। लेकिन इस बार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर कुछ अलग नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया सैन्य टकराव के कारण कच्चे तेल की कीमतें एक महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे वैश्विक महंगाई की आशंका बढ़ गई है।
महंगाई और डॉलर की मजबूती
महंगाई की बढ़ती आशंका के बीच निवेशकों ने अमेरिकी डॉलर की ओर रुख किया है, जिससे डॉलर दो सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत डॉलर में निर्धारित होती है, इसलिए अमेरिकी मुद्रा की मजबूती से अन्य मुद्राओं में सोने की कीमतें महंगी हो जाती हैं, जिससे उसकी मांग पर दबाव पड़ सकता है।
ब्याज दरों पर बाजार की धारणा
जेफरीज के स्वामित्व वाली ट्रेडू के वरिष्ठ बाजार विश्लेषक निकोस त्जाबूरास ने बताया कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, जिससे महंगाई का जोखिम बढ़ रहा है और अमेरिकी केंद्रीय बैंक पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव बन रहा है। उनके अनुसार, ब्याज दरों को लेकर बदलती बाजार धारणा और मुद्रा की वास्तविक कीमत में गिरावट की चिंता के बीच सोने में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
अमेरिकी केंद्रीय बैंक की संभावनाएं
अमेरिकी केंद्रीय बैंक के गवर्नर माइकल बर ने कहा है कि यदि महंगाई तेजी से कम नहीं होती है, तो ब्याज दर बढ़ाने का समय आ सकता है। इससे पहले केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष केविन वॉर्श भी इसी तरह के संकेत दे चुके हैं। बाजार में इस महीने होने वाली बैठक में ब्याज दर बढ़ने की 68 प्रतिशत संभावना मानी जा रही है।
निवेशकों की प्राथमिकताएं
उच्च ब्याज दरें सोने के लिए आमतौर पर नकारात्मक मानी जाती हैं, क्योंकि सोने से नियमित ब्याज या आय नहीं मिलती। ऐसे माहौल में निवेशक ब्याज देने वाली संपत्तियों की ओर अधिक आकर्षित हो सकते हैं।
अमेरिका के रोजगार आंकड़े
अब बाजार की नजर अमेरिका के रोजगार आंकड़ों पर भी है। बुधवार को निजी क्षेत्र के रोजगार से जुड़े आंकड़े और शुक्रवार को गैर-कृषि रोजगार के आंकड़े जारी होने वाले हैं। इन आंकड़ों से अमेरिकी केंद्रीय बैंक के अगले फैसले को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
अन्य कीमती धातुओं की स्थिति
अन्य कीमती धातुओं में चांदी 0.1 प्रतिशत बढ़कर 64.35 डॉलर प्रति औंस रही। वहीं, प्लैटिनम 0.4 प्रतिशत गिरकर 1,734.06 डॉलर और पैलेडियम 0.6 प्रतिशत बढ़कर 1,319.12 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। आने वाले दिनों में सोने की दिशा डॉलर, अमेरिकी ब्याज दरों और पश्चिम एशिया के तनाव पर काफी हद तक निर्भर रहने वाली है।
