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सोने की कीमतों में गिरावट जारी, निवेशकों की नजर ब्याज दरों पर

सोने की कीमतों में लगातार गिरावट का सिलसिला जारी है, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव 4,300 डॉलर प्रति औंस के नीचे चला गया है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और महंगाई की चिंताएं इस गिरावट के प्रमुख कारण हैं। अमेरिकी केंद्रीय बैंक के ब्याज दरों के फैसले पर निवेशकों की नजर है। जानें इस गिरावट के पीछे के कारण और भविष्य में क्या हो सकता है।
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सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला

सोने की कीमतों में लगातार तीसरे सप्ताह गिरावट देखने को मिली है, और सोमवार को भी इस पर दबाव बना रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव 4,300 डॉलर प्रति औंस के नीचे चला गया है। निवेशकों की निगाहें अब अमेरिकी केंद्रीय बैंक के आगामी ब्याज दर के फैसले पर टिकी हुई हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और महंगाई की चिंताओं ने सोने की चमक को कुछ हद तक कम कर दिया है।


सोने का वर्तमान भाव

सोमवार को भारतीय समयानुसार दोपहर करीब 2:50 बजे हाजिर सोना लगभग 4,290.5 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। यह स्तर हाल के अगस्त-सितंबर के उच्चतम स्तर से काफी नीचे है। पिछले कुछ हफ्तों में सोने की कीमत 4,600 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गई थी, जिसके बाद निवेशकों ने मुनाफा निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।


लंबी अवधि में सोने का प्रदर्शन

हालांकि, लंबे समय में सोने का प्रदर्शन अभी भी मजबूत बना हुआ है। पिछले एक वर्ष में इसकी कीमत में लगभग 16.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस प्रकार, हाल की गिरावट को पूरी तरह से कमजोरी के संकेत के रूप में नहीं देखा जा रहा है। निवेशक अब ब्याज दरों और महंगाई के अगले रुख को समझने की कोशिश कर रहे हैं।


कच्चे तेल की कीमतों का प्रभाव

सोने पर दबाव बढ़ाने का एक प्रमुख कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। सोमवार को कच्चे तेल का भाव लगभग 102.62 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। सऊदी अरब में ड्रोन हमलों के कारण उसकी प्रमुख पूर्व-पश्चिम तेल पाइपलाइन को बंद करना पड़ा। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण तेल की आपूर्ति और समुद्री परिवहन में जोखिम बढ़ गया है।


महंगाई की चिंताएं

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से वृद्धि से वैश्विक स्तर पर महंगाई का खतरा बढ़ता है। ऊर्जा की लागत में वृद्धि से परिवहन, उत्पादन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें प्रभावित होती हैं। इससे केंद्रीय बैंकों पर ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखने का दबाव बढ़ सकता है।


ब्याज दरों में संभावित वृद्धि

इस कारण से अमेरिकी केंद्रीय बैंक के रुख को लेकर निवेशक सतर्क हैं। बाजार में बुधवार को 25 आधार अंकों की ब्याज दर वृद्धि की लगभग 90 प्रतिशत संभावना जताई जा रही है। आमतौर पर, ब्याज दरों में वृद्धि से सोने पर दबाव पड़ता है, क्योंकि सोने से नियमित ब्याज आय नहीं मिलती और निवेशकों के लिए ब्याज देने वाले विकल्प अधिक आकर्षक हो जाते हैं।


महंगाई के ताजा आंकड़े

अमेरिका के हालिया महंगाई आंकड़ों ने भी चिंता बढ़ाई है। अगस्त में उपभोक्ता कीमतों में 0.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि जुलाई में यह वृद्धि 0.1 प्रतिशत थी। सालाना आधार पर महंगाई दर 3.4 प्रतिशत रही। खाद्य और ऊर्जा की कीमतों को अलग रखने वाली मूल महंगाई दर भी अगस्त में 0.3 प्रतिशत बढ़ी है।


पश्चिम एशिया में तनाव

पश्चिम एशिया में कूटनीतिक समाधान की उम्मीदें भी कमजोर हुई हैं। ईरान और खाड़ी देशों के बीच प्रस्तावित बैठक टलने के बाद तनाव कम होने की उम्मीदों को झटका लगा है। इसका सीधा असर तेल बाजार पर दिखाई दे रहा है और ऊंची ऊर्जा कीमतों ने महंगाई को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।


भारत में सोने का वायदा कारोबार

भारत में भी सोने के वायदा कारोबार में कमजोरी देखी गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने का भाव 1,52,655 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा, जो पिछले बंद भाव 1,52,784 रुपये से 129 रुपये नीचे था। कारोबार के दौरान भाव 1,50,600 रुपये के निचले स्तर और 1,53,836 रुपये के ऊंचे स्तर तक गया। आने वाले दिनों में अमेरिकी ब्याज दरों, तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे।