सोने की हॉलमार्किंग में नया बदलाव: HUID ट्रांसफर सिस्टम की शुरुआत
सोने की खरीद में बदलाव की तैयारी
सोना खरीदने वाले ग्राहकों के लिए हॉलमार्किंग प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव की योजना बनाई जा रही है। सरकार HUID ट्रांसफर सिस्टम का परीक्षण कर रही है, जिससे हॉलमार्क वाले गहनों की बिक्री के बाद उनके रिकॉर्ड को अपडेट किया जा सकेगा। वर्तमान में, यह परीक्षण बड़े और संगठित ज्वेलर्स के साथ चल रहा है।
HUID से मिलेगी गहनों की डिजिटल पहचान
HUID, यानी हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर, हर हॉलमार्क वाले सोने के गहने को दिया जाने वाला एक विशेष छह अंकों का नंबर है। ग्राहक इस नंबर की जानकारी BIS Care ऐप के माध्यम से देख सकते हैं। प्रस्तावित प्रणाली में इस पहचान को आगे की बिक्री से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। जब गहना बेचा जाएगा, तो उसका रिकॉर्ड अपडेट होगा, जिससे यह जानकारी मिलेगी कि वस्तु पहले ही बेची जा चुकी है। इससे गहनों की खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड अधिक व्यवस्थित हो सकेगा।
'SOLD' टैग से पुराने रिकॉर्ड पर नजर
नए सिस्टम में HUID के साथ 'SOLD' टैग जोड़ने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई हॉलमार्क वाला गहना पहले से बेचा गया है या नहीं। इसके अतिरिक्त, गहने के वजन और तस्वीर को भी रिकॉर्ड से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है। इससे केवल HUID नंबर ही नहीं, बल्कि गहने का वास्तविक वजन और उसकी तस्वीर भी पहचान का हिस्सा बन सकती है। इससे रिकॉर्ड की विश्वसनीयता में वृद्धि होगी और किसी नंबर के गलत इस्तेमाल की पहचान करना आसान होगा।
चोरी के सोने की बिक्री पर रोक
HUID ट्रांसफर सिस्टम का एक महत्वपूर्ण लाभ संदिग्ध या चोरी के सोने की पुनर्विक्रय पर निगरानी बढ़ाना हो सकता है। यदि किसी गहने का बिक्री इतिहास डिजिटल रिकॉर्ड में मौजूद रहेगा, तो ज्वेलर्स पुराने गहने को खरीदने से पहले उसकी जानकारी की जांच कर सकेंगे। इससे संदिग्ध लेनदेन की पहचान करना आसान हो जाएगा। साथ ही, ग्राहकों के लिए यह जानना भी सरल होगा कि गहने की पहचान और हॉलमार्किंग का रिकॉर्ड उपलब्ध है या नहीं। इससे ज्वेलरी उद्योग में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
बड़े ज्वेलर्स के साथ ट्रायल
वर्तमान में, इस प्रणाली का परीक्षण बड़े कॉर्पोरेट और संगठित ज्वेलर्स के साथ किया जा रहा है। इस दौरान तकनीकी प्रक्रियाओं और रोजमर्रा के कारोबार में आने वाली चुनौतियों को समझने का प्रयास किया जाएगा। ट्रायल के परिणामों के आधार पर इसे पूरे ज्वेलरी उद्योग में लागू करने का निर्णय लिया जा सकता है। यदि यह प्रणाली व्यापक स्तर पर लागू होती है, तो ग्राहकों को सोने की पहचान और बिक्री रिकॉर्ड से संबंधित अधिक स्पष्ट जानकारी प्राप्त हो सकेगी। इससे भारत की हॉलमार्किंग व्यवस्था अधिक डिजिटल और ट्रेसेबल बनने की दिशा में आगे बढ़ेगी।
