Newzfatafatlogo

सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट: जानें क्या है कारण?

15 सितंबर को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई है, जिसका मुख्य कारण वैश्विक संकेतों में कमजोरी और महंगाई का बढ़ता दबाव है। कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और ब्याज दरों की बदलती उम्मीदों ने भी इन कीमती धातुओं की मांग को प्रभावित किया है। जानें इस गिरावट के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
 | 

सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट


नई दिल्ली: 15 सितंबर का दिन सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए अच्छा नहीं रहा। वैश्विक बाजार में कमजोर संकेतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण इन दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट आई है। कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि ने महंगाई की चिंता को बढ़ा दिया है, जबकि अमेरिका और जापान में ब्याज दरों के बारे में बदलती उम्मीदों ने सोने की मांग पर भी असर डाला है।


एक दिन स्थिर रहने के बाद, सोने की कीमतों में लगातार दूसरे दिन कमी आई है। पिछले दो कारोबारी दिनों में 24 कैरेट सोने का भाव 10 ग्राम पर 500 रुपये और 22 कैरेट सोने का भाव 460 रुपये घटा है। मंगलवार को सोने की कीमतों में 24 और 22 कैरेट दोनों में 10-10 रुपये की गिरावट आई। महंगाई के बढ़ते दबाव के कारण केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें बदल रही हैं, जिससे सोने जैसे निवेश साधनों की मांग प्रभावित हो रही है।


चांदी की कीमतों में भी गिरावट

तीन दिन बाद चांदी की कीमतों में कमी


चांदी की कीमतों में भी आज गिरावट आई है। लगातार तीन दिनों तक स्थिर रहने के बाद, मंगलवार को एक किलो चांदी 100 रुपये सस्ती हुई। दिल्ली में चांदी का भाव अब 2,44,900 रुपये प्रति किलो है। मुंबई और कोलकाता में भी चांदी इसी कीमत पर बिक रही है, जबकि चेन्नई में चांदी का भाव 2,49,900 रुपये प्रति किलो है, जो चारों प्रमुख महानगरों में सबसे अधिक है। इससे पहले 11 सितंबर को चांदी की कीमतों में 10,000 रुपये की बड़ी गिरावट आई थी।


कीमतों पर दबाव के कारण

सोना-चांदी पर दबाव के कारण


इस समय कीमती धातुओं पर कच्चे तेल की महंगाई, मजबूत डॉलर और बढ़ती बॉंड यील्ड का प्रभाव देखा जा रहा है। पश्चिमी एशिया में नए तनाव के चलते तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस कारण US क्रूड की कीमत 1.27 फीसदी बढ़कर 102.68 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट की कीमत 1.21 फीसदी बढ़कर 106.96 डॉलर प्रति बैरल हो गई है।


महंगे तेल के कारण महंगाई लंबे समय तक ऊंची रह सकती है, जिससे केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में राहत देना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा, डॉलर इंडेक्स 0.05 फीसदी बढ़कर 99.53 पर पहुंच गया है। अमेरिकी ट्रेजरी की 10 साल की यील्ड भी बढ़कर 5 फीसदी तक पहुंच गई, जो 2023 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। ऊंची यील्ड से बिना ब्याज वाले सोने को रखने की लागत बढ़ती है, जिससे इसकी मांग कमजोर हो सकती है।