हरित विमान ईंधन से किसानों की आय में वृद्धि और पर्यावरण संरक्षण
हरित विमान ईंधन का महत्व
हरित विमान ईंधन का उपयोग न केवल विमानन क्षेत्र को पर्यावरण के अनुकूल बनाने में सहायक होगा, बल्कि यह किसानों की आय में प्रति हेक्टेयर लगभग 160-300 डॉलर (15,000-29,000 रुपये) की वृद्धि भी कर सकता है। यह जानकारी टिकाऊ विमान ईंधन (एसएएफ) के विशेषज्ञों ने सोमवार को साझा की। एसएएफ, पारंपरिक विमान ईंधन का एक कम कार्बन उत्सर्जन वाला विकल्प है, जिसे नवीकरणीय और अपशिष्ट सामग्री से तैयार किया जाता है।
एसएएफ का पर्यावरणीय प्रभाव
यह पारंपरिक विमान ईंधन की तुलना में पूरे जीवन चक्र में कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को 80 प्रतिशत तक कम करने में सक्षम है। एसएएफ एसोसिएशन के महासचिव रोहित कुमार ने राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित दो-दिवसीय एसएएफ कॉन्क्लेव एंड अवॉर्ड्स 2026 में कहा कि एसएएफ उद्योग के सहयोग और वैश्विक साझेदारी के माध्यम से पूरी एसएएफ मूल्य श्रृंखला को एकजुट करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उत्पादन और आपूर्ति की चुनौतियाँ
डॉ. आलोक शर्मा, एसएएफ एसोसिएशन के उपाध्यक्ष और इंडियन ऑयल के पूर्व शोध एवं विकास निदेशक, ने कहा कि उत्पादन का विस्तार आपूर्ति पर निर्भर करेगा। उन्होंने बताया कि एसएएफ का बड़े पैमाने पर उत्पादन बढ़ाने के लिए विश्वसनीय कच्चे माल, प्रौद्योगिकी, वित्तपोषण, प्रमाणन, बुनियादी ढांचे और दीर्घकालिक खरीद प्रतिबद्धताओं की आवश्यकता होगी।
भारत का एसएएफ उत्पादन
एसएएफ एसोसिएशन का अनुमान है कि टिकाऊ विमान ईंधन के उपयोग से न केवल विमानन क्षेत्र को पर्यावरण-अनुकूल बनाने में मदद मिलेगी, बल्कि किसानों की आय में प्रति हेक्टेयर करीब 160-300 डॉलर (15,000-29,000 रुपये) की वृद्धि हो सकती है। भारत 2050 तक सालाना लगभग चार करोड़ टन एसएएफ का उत्पादन कर सकता है, जो वैश्विक उत्पादन का लगभग 10 प्रतिशत होगा।
भारत-ओमान सहयोग की संभावनाएँ
ओमान के राजदूत ईसा सालेह अब्दुल्ला सालेह अल शिबनी ने सहयोग की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का एसएएफ परिवर्तन ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और निवेश के क्षेत्र में सहयोग के महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि मजबूत भारत-ओमान साझेदारी टिकाऊ विमानन समाधान विकसित करने में सहायक हो सकती है।
उपलब्धता और संग्रह की चुनौतियाँ
भारत में लगभग 1.5 अरब लीटर गन्ना आधारित एथनॉल की उपलब्धता से ‘अल्कोहल-टू-जेट’ ईंधन उत्पादन को बढ़ावा मिल सकता है। इसके अलावा, भारत में सालाना 2.9 से 3.0 करोड़ टन खाद्य तेल की खपत से 18-26 लाख टन इस्तेमाल हो चुका खाद्य तेल (यूसीओ) उपलब्ध हो सकता है। हालांकि, इसका बहुत छोटा हिस्सा ही अधिकृत संग्रह केंद्रों तक पहुंचता है।
आईएससीसी-कोर्सिया प्रमाणन
भारत में पहले से चार आईएससीसी-कोर्सिया प्रमाणित सह-प्रसंस्करण संयंत्र हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता 1,06,500 टन है। अगला कदम इस व्यवस्था को खेत और रसोई स्तर तक ले जाना है, ताकि कार्बन अर्थव्यवस्था विश्वसनीय बनी रहे। आईएससीसी-कोर्सिया एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता-प्राप्त प्रमाणन प्रणाली है, जिसका उद्देश्य टिकाऊ विमान ईंधन के सत्यापन के जरिये विमानन क्षेत्र में ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन में कमी सुनिश्चित करना है।
भविष्य की योजनाएँ
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में एसएएफ के मिश्रण का लक्ष्य 2027 में एक प्रतिशत, 2028 में दो प्रतिशत और 2030 तक पांच प्रतिशत रखा गया है। इसके साथ, एसएएफ की मांग लगभग 46,000 टन से बढ़कर 2.5 लाख टन होने की उम्मीद है। एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के अनुसार, भारत में विमान ईंधन की मांग 2024 में 1,92,000 बैरल प्रतिदिन से बढ़कर 2031 तक 2,77,000 बैरल प्रतिदिन हो सकती है।
सम्मेलन की गतिविधियाँ
इस दो दिवसीय सम्मेलन में कंपनियों के बीच (बी2बी) और सरकार तथा कंपनियों के बीच (बी2जी) बैठकें, समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर, तकनीकी कार्यशालाएँ और एसएएफ-जैव अर्थव्यवस्था पर चर्चा की जाएगी। इस अवसर पर एसएएफ के यूट्यूब चैनल ‘सैफटाइम्स डॉट कॉम’ की भी शुरुआत की गई।
