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हरियाणा में बिजली संकट: उद्योगों पर भारी पड़ रहा है संकट, जानें क्या है स्थिति

हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली संकट ने कंपनियों के लिए कार्य संचालन को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। गुरुग्राम में उद्योगों को 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। बिजली कर्मचारियों की हड़ताल और निजी कंपनी को वितरण लाइसेंस देने के फैसले के विरोध ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। जनरेटर पर निर्भरता से लागत दोगुनी हो गई है, जिससे छोटे और मध्यम उद्यमों पर दबाव बढ़ रहा है। उद्योग संगठन ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है ताकि बिजली आपूर्ति को सामान्य किया जा सके।
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हरियाणा के उद्योगों में बिजली संकट का असर


हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति में कमी ने कंपनियों के लिए कार्य संचालन को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। गुरुग्राम और उसके आस-पास के क्षेत्रों में कई व्यवसाय उत्पादन में रुकावट और बढ़ते खर्चों के कारण चिंतित हैं। प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष दीपक मैनी के अनुसार, बिजली संकट के चलते गुरुग्राम के उद्योगों को अब तक लगभग 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।


बिजली वितरण लाइसेंस का विवाद

बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का कारण गुरुग्राम और नूंह में एक निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस देने का निर्णय बताया जा रहा है। हरियाणा बिजली नियामक आयोग ने इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को इन दोनों जिलों में 25 वर्षों के लिए समानांतर वितरण लाइसेंस प्रदान किया है।


इस व्यवस्था के तहत मौजूदा बिजली वितरण कंपनी के साथ एक और कंपनी भी संबंधित क्षेत्रों में बिजली उपलब्ध करा सकेगी। योजना के अनुसार, नई कंपनी का नेटवर्क तैयार होने पर 8.3 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्तिकर्ता चुनने का विकल्प मिल सकता है। इसमें गुरुग्राम शहर, आसपास के उपनगरीय इलाके, मानेसर, सोहना और नूंह शामिल हैं। कर्मचारी संगठनों ने इस व्यवस्था का विरोध किया है।


जनरेटर पर निर्भरता से बढ़ते खर्च

उद्योग संगठन के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में कई इकाइयां एक यूनिट बिजली के लिए लगभग 10 से 11 रुपये खर्च करती हैं। लेकिन जब बिजली कटती है, तो जनरेटर चलाने की लागत बढ़कर 22 से 23 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच जाती है।


बड़ी कंपनियों के पास अक्सर वैकल्पिक बिजली व्यवस्था होती है, जिससे वे कुछ समय तक उत्पादन जारी रख सकती हैं। फिर भी, लगातार बिजली संकट उनके कामकाज पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए बढ़ी हुई लागत एक बड़ी चुनौती बन गई है।


सरकार से समाधान की अपील

प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने हरियाणा सरकार को पत्र भेजकर औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति को जल्द सामान्य करने की मांग की है। संगठन के अनुसार, 21 अक्टूबर की रात से शुरू हुई हड़ताल के बाद कई स्थानों पर उत्पादन गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।


पत्र में बिजली शिकायत केंद्रों और संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने के बावजूद समाधान न मिलने की शिकायत भी की गई है। संगठन का कहना है कि कुछ उपभोक्ताओं को कर्मचारियों की हड़ताल के कारण बिजली बहाली में कठिनाई का सामना करना पड़ा। इससे फैक्ट्रियों और आवश्यक सेवाओं को चालू रखने में भी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।


उत्पादन और डिलीवरी पर प्रभाव

रेडियस सिनर्जीज इंटरनेशनल के कार्यकारी निदेशक डॉ. भारत भूषण ने कहा कि लंबे समय तक बिजली की कमी से उत्पादन, तैयार माल की उपलब्धता और ग्राहकों तक सामान पहुंचाने की समयसीमा प्रभावित हो सकती है।


यदि फैक्ट्रियों को लगातार वैकल्पिक बिजली पर निर्भर रहना पड़ा, तो उनकी परिचालन लागत बढ़ेगी और कारोबार की प्रतिस्पर्धात्मकता कमजोर हो सकती है। इसका असर कर्मचारियों, आपूर्तिकर्ताओं और ग्राहकों तक भी पहुंच सकता है।


समस्या का शीघ्र समाधान आवश्यक

उद्योग जगत की मांग है कि सरकार और प्रदर्शन कर रहे कर्मचारी बातचीत के माध्यम से विवाद का समाधान करें, ताकि बिजली आपूर्ति सामान्य हो सके। हालांकि, नुकसान का वास्तविक स्तर संबंधित इकाइयों के आंकड़ों से ही स्पष्ट होगा। लेकिन यदि संकट लंबा खिंचता है, तो गुरुग्राम सहित हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन और कारोबार पर दबाव और बढ़ सकता है।