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9वीं कक्षा में आपातकाल का इतिहास पढ़ाने की तैयारी

एनसीईआरटी ने 9वीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में आपातकाल का अध्याय शामिल किया है, जो भारतीय लोकतंत्र की महत्वपूर्ण चुनौतियों को दर्शाता है। इस पाठ्यपुस्तक में मीडिया की भूमिका, जयप्रकाश नारायण के आंदोलन और प्राचीन सभ्यताओं का अध्ययन भी किया जाएगा। यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप है और छात्रों को भारतीय सभ्यता और संस्कृति के महत्व को समझने में मदद करेगा।
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आपातकाल का अध्याय शामिल


आपातकाल की घोषणा के लगभग 50 साल बाद, एनसीईआरटी ने 9वीं कक्षा की पाठ्यपुस्तक में आपातकाल का अध्याय जोड़ा है। इसे भारतीय लोकतंत्र की महत्वपूर्ण चुनौतियों में से एक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद ने सामाजिक विज्ञान की नई किताब में आपातकाल को प्रमुखता दी है।


आपातकाल 21 महीने तक लागू रहा। पाठ्यपुस्तक में छात्रों को मीडिया की भूमिका को भी समझाया जाएगा, जो लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। 25 जून, 1975 की रात तत्कालीन प्रधानमंत्री ने आपातकाल की घोषणा की थी, और आज इस घटना की बरसी है।


जयप्रकाश नारायण के आंदोलन का उल्लेख

एनसीईआरटी की नई पाठ्यपुस्तक 'अंडरस्टैंडिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियांड' में लोकतंत्र की चुनौतियों से संबंधित पाठ में पृष्ठ संख्या 155 पर आपातकाल का उल्लेख किया गया है। इसमें बताया गया है कि आपातकाल कब लागू हुआ और कब समाप्त हुआ। साथ ही, आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों के हनन और जयप्रकाश नारायण के आंदोलन का भी जिक्र किया गया है।


पाठ्यक्रम में बदलाव

यह पाठ्यपुस्तक राष्ट्रीय शिक्षा नीति और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा के अनुसार तैयार की गई है। नई किताब में भारतीय सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत को अधिक महत्व दिया गया है, जबकि यूरोप-केंद्रित विषयों को सीमित किया गया है। इतिहास में पढ़ाए जाने वाले फ्रांसीसी क्रांति, समाजवाद, रूसी क्रांति, नाजीवाद और हिटलर के उदय जैसे अध्याय हटा दिए गए हैं।


प्राचीन सभ्यताओं का अध्ययन

नई पाठ्यपुस्तक में छात्रों को हड़प्पा, मेसोपोटामिया, मिस्र और चीन की प्राचीन सभ्यताओं के विषयों का अध्ययन करने का अवसर मिलेगा। इसमें उन्हें इन सभ्यताओं का कालक्रम और भौगोलिक विस्तार समझने को मिलेगा, साथ ही सुमेरियन सभ्यता की सिंचाई प्रणाली, निर्माण कार्य और सामाजिक संगठन के बारे में भी जानकारी मिलेगी।