भारत की विश्वविद्यालय रैंकिंग में गिरावट: केवल छह संस्थान शीर्ष 100 में शामिल
भारत की विश्वविद्यालय रैंकिंग पर एक नजर
भारत ने संख्या के मामले में प्रगति की है, लेकिन गुणवत्ता में गिरावट चिंता का विषय है। हाल ही में जारी की गई सूची में, केवल छह भारतीय संस्थान ही शीर्ष 100 में स्थान बना सके हैं।
क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में लगातार दूसरे वर्ष, भारत का कोई विश्वविद्यालय एशिया के शीर्ष 50 में नहीं पहुंच सका है। यह ध्यान देने योग्य है कि यह सूची केवल एशिया के लिए है। ताजा रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि कई प्रमुख भारतीय संस्थानों की रैंकिंग में गिरावट आई है। हालांकि, एक सकारात्मक पहलू यह है कि क्यूएस सूची में अब भारत के 325 संस्थान शामिल हैं, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 294 थी। चीन के 448 उच्च शिक्षा संस्थानों के बाद, भारत का प्रतिनिधित्व सबसे अधिक है।
इस प्रकार, संख्या के मामले में भारत ने प्रगति की है, लेकिन गुणवत्ता में गिरावट निराशाजनक है। शीर्ष 100 में केवल छह संस्थान शामिल हैं, जबकि पिछले वर्ष सात भारतीय संस्थान थे। इस बार जिन छह संस्थानों ने स्थान पाया है, उनमें पांच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान और बंगलुरू स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान शामिल हैं। क्यूएस रैंकिंग की आलोचनाओं का उल्लेख करते हुए, भारतीय नागरिक यह जानकर संतोष पा सकते हैं कि यह सूची मुख्यतः प्रतिष्ठा सर्वेक्षणों पर निर्भर करती है, जिससे पहले से प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों को अतिरिक्त लाभ मिलता है।
हाल के वर्षों में, जिन संस्थानों की छवि में सुधार नहीं हो रहा है, उनकी साख पर हमले का एक चिंताजनक रुझान भारत में उभरता दिखाई दे रहा है। हालांकि, यह दृष्टिकोण अपनी कमियों से मुंह मोड़ने का प्रयास माना जा सकता है। क्यूएस रैंकिंग तैयार करते समय, संस्थान की शैक्षणिक प्रतिष्ठा, रोजगार देने वाली कंपनियों के बीच प्रतिष्ठा, शोध का प्रभाव, शिक्षक-छात्र अनुपात, अंतरराष्ट्रीय शिक्षकों और छात्रों की उपस्थिति, और स्नातकों के रोजगार की दर जैसे मानदंडों को ध्यान में रखा जाता है। क्या ये मानदंड महत्वपूर्ण नहीं हैं? इन मानदंडों पर प्रगति की आवश्यकता है, लेकिन दुर्भाग्य से, समाज में इस पर अधिक ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
