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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: भारतीय बॉक्सिंग टीम के सपोर्ट स्टाफ को तीन महीने से नहीं मिली सैलरी

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने 39 पदक जीते, जिसमें 10 मुक्केबाजों का योगदान रहा। हालांकि, उनकी सफलता के पीछे काम करने वाले सपोर्ट स्टाफ को तीन महीने से वेतन नहीं मिला है। इस मुद्दे ने एशियन गेम्स की तैयारियों पर भी असर डालने की संभावना जताई है। जानें इस स्थिति के बारे में और क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
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कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की सफलता

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स में अपने अभियान को 39 पदक जीतकर समाप्त किया, जिसमें चौथे स्थान पर रहकर पदक तालिका में अपनी स्थिति मजबूत की। इस सफलता में भारतीय बॉक्सरों का योगदान अत्यधिक महत्वपूर्ण रहा है। भारत के कुल 39 पदकों में से 10 पदक मुक्केबाजों के शानदार प्रदर्शन के कारण आए, जिनमें से 7 स्वर्ण पदक थे। हालांकि, इस सफलता के पीछे जिन सपोर्ट स्टाफ का योगदान रहा है, उन्हें पिछले तीन महीनों से वेतन नहीं मिला है।


सपोर्ट स्टाफ की वेतन समस्या

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय मुक्केबाजी टीम के 12 सपोर्ट स्टाफ को तीन महीने से वेतन नहीं मिला है। ये सदस्य NIS पटियाला से लेकर बेलफास्ट में हुई तैयारियों तक, मुक्केबाजों को कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए तैयार करने में जुटे रहे। जिन सपोर्ट स्टाफ को वेतन नहीं मिला, उनमें द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित हेड कोच सी. कुटप्पा भी शामिल हैं। इसके अलावा, टीम के डॉक्टर, मनोचिकित्सक, वीडियो एनालिस्ट और मसाज थेरेपिस्ट भी इस समस्या का सामना कर रहे हैं।


सपोर्ट स्टाफ की सैलरी

बॉक्सिंग टीम के सपोर्ट स्टाफ की सैलरी कितनी होती है?

रिपोर्ट के अनुसार, कोच की सैलरी 1.5 से 2 लाख रुपये होती है, जबकि डॉक्टर को 1.5 लाख रुपये मिलते हैं। मसाज थेरेपिस्ट को 40 से 50 हजार रुपये, मनोचिकित्सक को 1 लाख रुपये और वीडियो एनालिस्ट को 80 हजार रुपये तक सैलरी मिलती है।


एशियन गेम्स की तैयारियों पर असर

सैलरी नहीं मिलने का असर

रिपोर्ट के अनुसार, कुछ सपोर्ट स्टाफ ने SAI से इस मामले में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्दी ही सैलरी का मामला सुलझ नहींा होता है, तो 10 अगस्त से एशियाई खेलों की तैयारियों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उनके लिए नेशनल शिविर में भाग लेना कठिन हो जाएगा।