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नीट परीक्षा में सुधार के लिए नंदन नीलेकणी की नियुक्ति

केंद्र सरकार ने नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सुधार के लिए नंदन नीलेकणी को NTA सुधार समिति में शामिल किया है। नीलेकणी, जो आधार परियोजना के प्रमुख चेहरों में से एक हैं, को परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और विश्वसनीयता को बढ़ाने के लिए जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस समिति में शिक्षा, तकनीक और सुरक्षा के विशेषज्ञ शामिल हैं, और इसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाना है। जानें इस महत्वपूर्ण नियुक्ति के पीछे की वजहें और इसके संभावित प्रभाव।
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नई दिल्ली में परीक्षा सुधार की दिशा में कदम


नई दिल्ली। नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में आई समस्याओं के मद्देनजर, केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस दिशा में, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को और अधिक सक्षम बनाने के लिए, सरकार ने इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। नीलेकणी का नाम चर्चा में है क्योंकि उनका राजनीतिक सफर किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं रहा है। उन्हें 2009 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार द्वारा भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। उन्होंने आधार परियोजना को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद, 2014 में, उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर बेंगलुरु दक्षिण लोकसभा सीट से चुनाव भी लड़ा था।


मोदी सरकार ने उन्हें NTA सुधार समिति में शामिल करके यह संदेश देने का प्रयास किया है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार को राजनीतिक मुद्दे के बजाय विशेषज्ञता और तकनीकी दृष्टिकोण से आगे बढ़ाया जाएगा। दरअसल, NTA पर परीक्षा की सुरक्षा, पेपर लीक, साइबर खतरों और डिजिटल प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर कई सवाल उठे हैं। ऐसे में, सरकार को ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता थी, जिसे बड़े स्तर पर डिजिटल प्रणाली विकसित करने और उसे सुरक्षित रखने का अनुभव हो। नीलेकणी का आधार परियोजना से जुड़ा अनुभव इस संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


इस समिति में शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ-साथ तकनीकी, सुरक्षा और प्रशासन के क्षेत्र से जुड़े लोग भी शामिल हैं। पूर्व इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ वी. कामाकोटी और पूर्व आईबी निदेशक तपन डेका जैसे नाम भी समिति का हिस्सा हैं। सरकार का उद्देश्य है कि परीक्षा प्रणाली को केवल पेपर लीक रोकने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि डिजिटल सुरक्षा, प्रश्नपत्रों की गोपनीयता, परीक्षा केंद्रों की निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करने जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया जाए।


नीलेकणी की नियुक्ति को राजनीतिक दृष्टिकोण से भी देखा जा रहा है। विपक्ष लंबे समय से परीक्षा प्रणाली को लेकर सरकार पर सवाल उठाता रहा है, लेकिन अब सुधार समिति की जिम्मेदारी ऐसे व्यक्ति को दी गई है, जिसकी पहचान एक तकनीकी विशेषज्ञ के रूप में है, न कि किसी राजनीतिक नेता के रूप में।